हिन्दू संतों के किसी भी मामले में हमारा कथित रूप से नेशनल लेकिन वास्तव में “नोएडा-गुडगाँव छाप” मीडिया बहुत उतावला रहता है, चाहे मामला आसाराम बापू का हो या फिर असीमानंद का.

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