राजनैतिक कविता...

स्वार्थ जब खुद का
पूरा ना कर पाएं,
तो दुनिया को स्वार्थी कहते हैं।

करने की होती है जब खुद की बारी,
हाथों से दोनों,
जेब अपनी भरते हैं।

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पेप्सी-कोक के खिलाफ तमिलनाडु से जागरण की शुरुआत...

तमिलनाडु ट्रेडर्स एसोसिएशन के सभी व्यापारी एक मार्च से पेप्सी और कोक के सभी उत्पादों का बहिष्कार करने जा रहे हैं. सभी व्यापारी संगठनों ने एक बैठक में निर्णय लिया है कि पेप्सी-कोक के उत्पादों को नहीं बेचा जाएगा.

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किराए अथवा ठेके पर खेती को कानूनी स्वरूप??

देश के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा सुधार होने की उम्मीद है, केंद्र द्वारा “ठेके पर खेती” को कानूनी बनानी की तैयारी चल रही है. ऐसा अनुमान है कि इससे न सिर्फ कृषि क्षेत्र में रोजगार बढ़ेगा, बल्कि भूमिहीनों को बैंकों से ऋण वगैरह भी दिया जा सकेगा.

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किसी पार्टी के पास चन्दे का हिसाब नहीं...

एक रिपोर्ट के अनुसार 2004-2015 के बीच अर्थात पिछले ग्यारह वर्षों में विभिन्न राजनैतिक दलों ने “अज्ञात” स्रोतों से 7833 करोड़ रूपए का चन्दा ग्रहण किया है, जो कि उनकी कुल आय का 69% है. इस चन्दे में सर्वाधिक रकम कौंग्रेस और भाजपा को मिली है.

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