ज़ाकिर नाईक की संस्था पर NIA का छापा

NIA ने विवादित और कट्टर इस्लामी विचारधारा का प्रसार-प्रचार करने वाले ज़ाकिर नाईक और उसके इस्लामिक रिसर्च फाउन्डेशन के लगभग 78 बैंक खातों का पता लगाया है और सभी बैंकों को इसकी रकम फ्रीज़ करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.

NIA के प्रवक्ता ने बताया कि यह छापे ज़ाकिर नाईक (जो लंबे समय से भारत के बाहर हैं) की संस्था पर प्रतिबन्ध के बाद जारी जाँच का एक हिस्सा हैं. विदेशों से मिलने वाले चन्दे एवं अनुदान की रकम का सही-सही पता लगाने के लिए NIA जाँच में जुटी है. इन बैंक खातों के अलावा ज़ाकिर नाईक एवं IRF की कुल 37 चल सम्पत्तियाँ भी सामने आई हैं, जिनकी कीमत सौ करोड़ से ऊपर बताई जाती है. NIA सूत्रों के अनुसार ज़ाकिर नाईक की यह परिसम्पतियाँ केवल मुम्बई में ही नहीं, बल्कि नासिक और पुणे में भी हैं. 

सुरक्षा एजेंसी ने ज़ाकिर नाईक के ज़हरीले भाषणों के लगभग 14,000 टेप और लगभग 5TB की हार्ड डिस्क भी ज़ब्त की हैं, जिसमें कई भाषण, दस्तावेज और इस्लामी कट्टरपंथ से सम्बन्धित सामग्री मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA के प्रमुख शरद कुमार भी दिल्ली से मुम्बई पहुँचे और उन्होंने मुम्बई पुलिस के उच्चाधिकारियों से एकांत में चर्चा की. उल्लेखनीय है कि मोदी सरकार ने प्रतिबंधित गतिविधियों एवं आपत्तिजनक साहित्य व भाषणों के कारण ज़ाकिर नाईक पर प्रतिबन्ध लगा दिया है, और तभी से ज़ाकिर नाईक भारत वापस लौटना और क़ानून का सामना करना टाल रहा है.मुस्लिम युवाओं को हिंसा के लिए उकसाना, हिन्दू ग्रंथों का मनमाना एवं विकृत अर्थ निकालकर झूठ परोसना तथा धार्मिक आधार पर केवल इस्लाम को सर्वश्रेष्ठ सिद्ध करने की धूर्तता भरी चालों को बेनकाब करने के लिए नाईक से सम्बन्धित सारी जानकारियाँ आम जनता तक पहुँचना जरूरी हैं. 

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