सैमसंग उप-प्रमुख घूस देने के आरोप में गिरफ्तार...

सैमसंग कंपनी से निकाले गए ली-जाए-योंग को दक्षिण कोरिया की पुलिस ने रिश्वतखोरी और घूस देने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है. ली योंग ने राष्ट्रपति के मित्र चोई सुन को साढ़े तीन करोड़ डॉलर की रिश्वत की पेशकश की थी, ताकि सैमसंग द्वारा योन्हाप न्यूज़ एजेंसी का जो अधिग्रहण किया जा रहा था, उसे सरकारी समर्थन और मदद मिल सके. इन दोनों कंपनियों का विलय काफी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा था, क्योंकि इस पर ही कम्पनी के मालिक ली कुआन ही के इकलौते पुत्र ली योंग का भविष्य टिका हुआ था. 

ली योंग को अपनी सफाई पेश करने का पूरा मौका दिया गया, साथ ही राष्ट्रपति से भी इस मामले में जवाब मांगे गए. राष्ट्रपति ने अपने किसी भी मित्र की जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया और उसे जेल भेजने का समर्थन किया. इसके सात दिनों बाद ली योंग को भी गिरफ्तार कर लिया गया. उसका रसूख और करोड़ों रूपए की संपत्ति काम नहीं आई.

उल्लेखनीय है कि सैमसंग कम्पनी दक्षिण कोरिया की सबसे बड़ी कंपनी मानी जाती है और ली योंग इस कंपनी के स्वमेव उत्तराधिकारी थे, परन्तु कम्पनी को विस्तार देने के चक्कर में उसने अपने पिता की मर्जी के खिलाफ रिश्वत की पेशकश की और फँस गया. इस घटना से यह तो पता चलता है कि रिश्वतखोरी और कंपनी मामलों में बड़ी-बड़ी घूस देने के मामले केवल भारत में नहीं हैं, अपितु सभी देशों में हैं. नेताओं-उद्योगपतियों और अफसरों का “नापाक त्रिकोण” सभी देशों में जमकर पैसा बनाता है. लेकिन साथ ही हमें यह भी पता चलता है कि दुसरे देशों क़ानून सख्ती से काम करता है. चाहे अमेरिका में जॉर्ज बुश की बेटी को शराब पीकर गाडी चलाने पर जुर्माने का मामला हो अथवा जर्मनी में स्टेफी ग्राफ के पिता को टैक्स चोरी के आरोप में जेल हो, वहीं भारत की क़ानून प्रक्रिया इस मामले में बेहद ढीली और छिद्र वाली सिद्ध हुई है. जब सैमसंग जैसी कंपनी दक्षिण कोरिया में ऐसी हरकत कर सकती है, तो सामान्य बुद्धि से ही समझा जा सकता है कि भारत में रिलायंस, टाटा, अडानी जैसे महाकाय समूह भारत की इस “लचीली व्यवस्था” से कितना फायदा उठाते होंगे. हालाँकि इसके बावजूद कभीकभार सहारा श्री सुब्रत रॉय अथवा विजय माल्या अथवा ललित मोदी जैसे कुछ मामले ऐसे आ ही जाते हैं, जहां न्यायपालिका पर भरोसा करना ही पड़ता है, लेकिन अभी तक लालू यादव के अलावा किसी बड़े नेता को देश की जनता ने जेल जाते नहीं देखा.

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