क्या मुरलीमनोहर जोशी भारत के अगले राष्ट्रपति बन सकते हैं?

अगले राष्ट्रपति के चुनावों की सुगबुगाहट आरम्भ हो चुकी है. तमाम राजनैतिक दल और विभिन्न संगठन अब अपने-अपने प्रत्याशी के बारे में विचार करने लगे हैं. पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद इस काम में अचानक तेजी आने की संभावना है.

चूंकि फिलहाल राज्यसभा में विपक्ष मजबूत है, इसलिए अगला राष्ट्रपति चुने जाने के लिए मोदी सरकार को विपक्ष को भी भरोसे में लेना होगा. इस बीच सूत्रों के अनुसार पता चला है कि RSS की तरफ से राष्ट्रपति पद के लिए मुरलीमनोहर जोशी का नाम आगे बढ़ाया जा रहा है. बताया जाता है कि मोदी सरकार के अगले दो वर्ष बचे रहने तथा 2019 के महत्त्वपूर्ण लोकसभा चुनावों के बाद की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लालकृष्ण आडवाणी संघ की पहली पसंद नहीं हैं.

2019 की लोकसभा सीटों में यदि त्रिशंकु की स्थिति बनी तो भाजपा सांसदों की विजय का गणित और विपक्षी सांसदों को साधने अथवा सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करते समय राष्ट्रपति की भूमिका महत्त्वपूर्ण हो सकती है. यही सब सोचकर संघ के वरिष्ठों ने जोशी का नाम आगे बढ़ाया है. उल्लेखनीय है कि ऐसी भी ख़बरें आती रहती हैं कि नरेंद्र मोदी एवं आडवाणी जी के सम्बन्ध भी उतने गर्मजोशी से भरे हुए नहीं हैं, इसलिए शायद प्रधानमंत्री मोदी मुरलीमनोहर जोशी के नाम पर अपनी सहमति दे सकते हैं.

असल में इस दौड़ में पहले सबसे आगे सुषमा स्वराज चल रही थीं, परन्तु उनके स्वास्थ्य और हालिया ऑपरेशन के पश्चात संभवतः अगले पाँच वर्षों के लिए उन्हें फिट नहीं पाया गया. यदि सुषमा स्वराज की उम्मीदवारी घोषित हो जाती, तो यह लगभग निश्चित हो जाता कि वे ही राष्ट्रपति बनतीं, क्योंकि विपक्ष में उनकी स्वीकार्यता अधिक है. बीच में यह अफवाह भी उड़ी थी कि इंदौर से सांसद लोकसभा अध्यक्षा श्रीमती सुमित्रा महाजन को भी राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है, लेकिन उनके साथ भी यही समस्या है कि संभवतः विपक्ष उनके नाम पर सहमत ना हो.
यदि विपक्ष की दृष्टि से ही देखा जाए तो उनके लिए मुरलीमनोहर जोशी भी स्वीकार्य नहीं होंगे. यदि इन पाँच राज्यों में विपक्ष का पलड़ा भारी रहा तो स्वाभाविक रूप से कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष भाजपा को इतनी आसानी से अपना राष्ट्रपति नहीं बनाने देगा. जो स्थिति अटलबिहारी वाजपेयी के सामने आई थी, वही स्थिति नरेंद्र मोदी के सामने भी आ सकती है और जैसे राजनीति से बाहर के व्यक्ति अर्थात अब्दुल कलाम को सर्वसम्मति से राष्ट्रपति चुना गया, वैसे ही इस बार भी प्रणब मुखर्जी का स्थान लेने के लिए मेट्रोमैन ई श्रीधरन का नाम अंतिम समय पर आगे बढ़ाया जा सकता है.

बहरहाल, जो भी हो... जिस प्रकार समूचा विपक्ष नरेंद्र मोदी और संघ के प्रति दुर्भावना और घृणा से भरा हुआ है, वैसी स्थिति में एक संघ स्वयंसेवक और विशेषकर एक ब्राह्मण अर्थात मुरलीमनोहर जोशी को उम्मीदवार घोषित करके, जिता ले जाना एक तनी हुई रस्सी पर चलने जैसी मुश्किल कवायद सिद्ध होगा. कुल मिलाकर बात यह है कि अगले राष्ट्रपति का चुनाव मजेदार और घोर राजनैतिक होने वाला है, देखते रहिए.

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