इंदिरा गाँधी और वामपंथियों को रूस से मिलती थी रिश्वत...

हाल ही में अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी CIA द्वारा सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के अनुसार 1970-1980 के दौरान तत्कालीन सोवियत युनियन सरकार ने भारत में कॉंग्रेस तथा वामपंथी पार्टियों को मोटी रिश्वतें तथा व्यापारिक लाभ पहुँचाए थे, ताकि वह भारत में अपनी पैठ मजबूत बना सके.

CIA के ये ख़ुफ़िया दस्तावेज पच्चीस वर्ष की सीमा के बाद नियमानुसार सार्वजनिक कर दिए जाते हैं. उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2005 में भी केजीबी के पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी मित्रोखिन ने भी अपनी पुस्तक में ऐसे ही दावे किए थे. हालाँकि उस समय यूपीए की सरकार होने के कारण स्वाभाविक रूप से मित्रोखिन की किताब को खारिज कर दिया गया तथा रिश्वत के इन आरोपों को वामपंथियों ने झूठा करार दिया था... लेकिन अब CIA द्वारा 25 वर्ष पूर्व के दस्तावेज जारी करने से उनका झूठ और धूर्तता पकड़ी गई है.

 

Moscow

CIA और मित्रोखिन के अनुसार उस समय इंदिरा गाँधी सहित कांग्रेस के चालीस प्रभावशाली सांसदों/मंत्रियों तथा सभी प्रमुख वामपंथी नेताओं को सोवियत सरकार की तरफ से रिश्वत दी जाती रही. उन दिनों सोवियत दूतावास में लाखों रूपए अतिरिक्त रखे रहते थे तथा कई सरकारी सौदों के समय वामपंथी बिचौलियों को दिए जाते थे. केजीबी के वरिष्ठ अधिकारी मित्रोखिन जिन्होंने चोरी-चुपके से रूस से कई दस्तावेज बाहर निकाले, ने भी अपनी पुस्तक में यही दावा किया था कि गाँधी परिवार को सीधे भुगतान किया जाता था. चुनावों के समय वामपंथी दलों खासकर CPI और CPM को बड़ी मात्रा में पैसा दिया गया, तथा केन्द्रीय रक्षा मंत्री वीके कृष्ण मेनन सहित पाँच प्रमुख मंत्रियों को मोटी घूस दी गई थी. वामपंथी नेताओं हरकिशन सिंह सुरजीत तथा ज्योति बसु के उद्योगपति पुत्र के बारे में भी तत्कालीन सोवियत संघ से तरह-तरह की “बिजनेस डील” की ख़बरें पहले भी आती रही हैं...

बहरहाल... झूठ के पाँव नहीं होते और सच देर से ही सही, लेकिन उजागर होकर रहता है....अब पैंतीस वर्ष के बाद, काँग्रेस-वामपंथ की मिलीभगत द्वारा की गई लूट के किस्से सामने आने लगे हैं...

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