बजट में “अल्पसंख्यकों” के लिए 4195 करोड़ रूपए??

इस वर्ष के बजट में मोदी सरकार ने “अल्पसंख्यकों” के लिए 4195 करोड़ रूपए का विशेष प्रावधान किया है. सवाल उठाने का वक्त आ गया है, कि “अल्पसंख्यक” किसे माना जाएगा? भारत जैसे देश जहाँ “सेकुलरिज्म” का मतलब मुस्लिमों की चमचागिरी होता है, वहां इस 4195 करोड़ रूपए में से अधिकाँश हिस्सा स्वाभाविक रूप से मुस्लिमों की जेब में ही पहुँच जाएगा. भारत में “अल्पसंख्यक” कौन होगा, इसका फैसला किस आधार पर किया जाना चाहिए?

एक विशाल जनसँख्या जो कि आधिकारिक रूप से कुल जनसँख्या का 14.2% है (अनधिकृत रूप से यह संख्या कहीं ज्यादा है), जिस समुदाय और पंथ के विश्व में पचास से अधिक देश हैं, जो ये दावा करते हैं कि उन्होंने भारत पर तीन सौ वर्ष तक शासन किया है... क्या ऐसे मुसलमानों को “अल्पसंख्यक” माना जाना चाहिए? आखिर उन्हें इस सब्सिडी अथवा सहायता या विशेष दर्जे की आवश्यकता ही क्या है? चूँकि वास्तव में मुस्लिम बादशाहों ने इतने वर्षों तक भारत पर शासन किया है, और अधिकाँश मुस्लिम देश तेल-संपन्न हैं तो फिर भारत के मुस्लिमों स्वयं को “अल्पसंख्यक” कहकर दीन-हीन क्यों बनाते हैं? क्यों सरकार के आगे हाथ पसारते हैं? (हाथ पसारने की बजाय, सरकार से छीनना कहना अधिक उचित होगा).

वास्तविक “अल्पसंख्यक” कौन है? ज़ाहिर है कि यजीदी अथवा पारसियों को अल्पसंख्यक माना जाना चाहिए, जिनका खुद का कोई देश नहीं बचा. उन्हें उनके मूल स्थान से दर-बदर कर दिया गया. इसी प्रकार भारत में इस्लामी कट्टरपंथ द्वारा कश्मीर से निकाले गए हिन्दू भी अल्पसंख्यक माने जाने चाहिए, क्योंकि वे तो और भी विशेष परिस्थिति में हैं (अपने ही देश में शरणार्थी बनना कहाँ का न्याय है?). इन समुदायों पर किसी भी मानवाधिकार समूह की निगाह क्यों नहीं पड़ती?? जैसे ही “अल्पसंख्यक” शब्द सामने आता है, वैसे ही केवल मुसलमान ही क्यों ध्यान में आता है?? क्या किसी ने इस पर विचार किया??

सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे और “वास्तविक अल्पसंख्यकों” को ही अपने बजट में विशेष आवंटन करे... ना कि 15% जनसंख्या वाले नकली अल्पसंख्यकों को...

Tags: desiCNN, Minorities in India, Budget allocation for Minority, Muslims are not minority in India, How Muslims could be minority, Union Budget 2017

ईमेल