2030 तक चन्द्रमा की गैस से ऊर्जा मिलने लगेगी...

इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक सिवानाथान पिल्लई ने कहा है कि जिस गति से भारत का अंतरिक्ष अभियान काम कर रहा है, उसे देखते हुए चन्द्रमा से निकलने वाली हीलियम-3 गैस द्वारा भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा काम करने लगेगा. एक पत्रिका द्वारा आयोजित “स्पेस डायलॉग” में चर्चा के दौरान श्री पिल्लई ने कहा कि दुनिया के कई देश इस तकनीक पर काम कर रहे हैं, लेकिन चन्द्रमा पर इतनी अधिक मात्रा में हीलियम गैस है कि दुनिया के कई बड़े देशों की बिजली और गैस की आपूर्ति वहाँ से हो सकती है. भारत का लक्ष्य 2030 तक इस गैस को भारत तक लाने का है. वैज्ञानिक ने आगे कहा कि चन्द्रमा पर हनीमून मनाने की कल्पना आगामी कुछ दशक में साकार हो जाएगी.

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ब्रह्मोस मिसाईल के लिए काम कर चुके पिल्लई ने कहा कि चीन, अमेरिका, रूस भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी गैस पर काम कर रहे हैं. इसी संगोष्ठी में ले.जनरल. पीएम बाली ने कहा कि GSAT-7 के रूप में सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप केवल सेना के लिए समर्पित एक बड़ा सैटेलाइट भी जल्द ही लॉन्च होगा, जिससे अंतरिक्ष के माध्यम से सीमाओं की सुरक्षा पर निगरानी रखने में आसानी होगी. दूसरी महाशक्तियों द्वारा अंतरिक्ष पर कब्जे की लड़ाई को देखते हुए, भारत चुप नहीं बैठ सकता उसे भी इस क्षेत्र का खिलाड़ी बनना ही होगा. ISRO द्वारा 104 उपग्रह एक साथ छोड़ने को ऐतिहासिक बताते हुए सभी वक्ताओं ने भारतीय वैज्ञानिक मेधा की जमकर प्रशंसा की.

वैज्ञानिकों ने उन तत्वों को बकवास करार दिया, जो अक्सर भूख-गरीबी-अशिक्षा का रोना रोते हुए वैज्ञानिक शोध अथवा उपग्रहों या ISRO के लिए पैसा खर्च करने को अपव्यय बताते हैं. उन्होंने कहा कि खुद अमेरिका में बेघरों की संख्या लाखों में है, चीन में भी जनता के असंतोष को दबाया जाता है, लेकिन किसी भी देश ने अपनी वैज्ञानिक उपलब्धि को पाने के लिए पैसा खर्च करने में कोई कंजूसी नहीं बरती है. वैज्ञानिक सफलता से देश को कई प्रकार के लाभ होते हैं, जिन्हें गरीबों के नाम पर राजनीति करने वाले नहीं समझ सकते.

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