"शत्रु संपत्ति विधेयक" संसद ने पास किया...

कल लोकसभा ने 1968 में लाए गए आधे-अधूरे शत्रु संपत्ति कानून पर संशोधन करके अंतिम मुहर लगा दी. अब इस क़ानून की धाराओं की कमजोरियों का फायदा उठाकर कोई भी पाकिस्तानी अथवा चीनी नागरिक भारत में छोड़ी गई उसकी संपत्ति पर अपना अधिकार नहीं जता सकेगा. उल्लेखनीय है कि यह सारा विवाद उस समय ताजातरीन हो गया था जब राजा महमूदाबाद के वंशजों, जो कि अभी पाकिस्तान में रह रहे हैं उन्होंने भारत में अपनी लाखों करोड़ रूपए की संपत्ति को वापस लेने अथवा बेचकर पैसा लेने हेतु सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाई थी.

इसी प्रकार सैफ अली खान के पुरखों द्वारा छोड़ी गई अथाह भू-संपत्ति भी अब सरकार के कब्जे में आ जाएगी, जिन के खिलाफ वर्षों से कई मामले कोर्ट में लंबित चल रहे हैं. लखनऊ, भोपाल और हैदराबाद में कई मुस्लिमों की ऐसी संपत्ति है जो बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए थे, अब उन्हें अपनी जमीन की कीमत चाहिए. जबकि पाकिस्तान ने ऐसा ही क़ानून 1950 में ही पारित कर दिया था और सभी सिखों-हिन्दुओं की संपत्तियां जब्त कर ली थीं, जो पाकिस्तान छोड़कर भारत चले गए थे. चूंकि हमारे यहाँ मुस्लिम-परस्त कांग्रेस तथा कथित मानवाधिकार के पैरोकारों का एक बड़ा गिरोह मौजूद है, इसलिए इतने वर्षों तक मामला लटका रहा.

कांग्रेस ने इस कानून को रोकने के लिए पिछले ढाई वर्ष में तमाम अड़ंगे लगाए, हालाँकि सरकार भी झुकने वाली नहीं थी, इसलिए वह लगातार अध्यादेश जारी करती रही. संसद में बोलते हुए कांग्रेस का यह रुख फिर से दिखा, जब उन्होंने इस क़ानून को "मुस्लिम विरोधी" बताया (यानी इतने चुनाव हारने के बावजूद अक्ल नहीं आ रही).
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इन जमीनों अथवा संपत्तियों में जो लोग किराएदार के रूप में रह रहे हैं उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी, अब वे अपना किराया सरकार को देंगे. लेकिन लगभग एक लाख करोड़ रूपए की जमीन जो कि खाली पड़ी है, उसे बेचकर सरकार राजस्व जुटाएगी ताकि यह जमीन भू-माफिया के हाथों में जाने से बच जाए.

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