शिवराज मामाजी ने दलितों के लिए राज्य का खजाना खोला...

मध्यप्रदेश के सागर में संत रविदास महाकुम्भ के अवसर पर एक समारोह में बोलते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि अगले तीन वर्ष में दलितों के उत्थान और उनके रोजगार एवं भलाई के कार्यक्रमों पर पचास हजार करोड़ रूपए खर्च किए जाएँगे. शिवराज सिंह ने कहा कि इस वर्ष के बजट में 16381 करोड़ का प्रावधान किया जा चुका है, बाकी का अगले दो बजटों में किया जाएगा. “मामाजी” ने सूचित किया कि इन पैसों से शहरी क्षेत्रों में दस लाख मकान बनाए जाएँगे जो गरीब दलितों को दिए जाएँगे. अकेले सागर जिले में अगले दो वर्ष में 40,000 छोटे मकान मध्यप्रदेश के निवासी दलितों को आवंटित किए जाएँगे.

मध्यप्रदेश के दलित बच्चों को स्कॉलरशिप और होस्टल की सुविधा तो मिल ही रही है, इसके अलावा उनकी ट्यूशन फीस भी सरकारी खजाने से भरी जा रही है (इसका बोझ किस पर पड़ेगा, ये आप जानते हैं). मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि दस संभागों में नए ज्ञानोदय स्कूल खोलने की योजना बनाई जा चुकी है. इसके अलावा UPSC की तैयारी के लिए मप्र से दिल्ली जाने वाले दलित युवाओं के लिए दिल्ली में भी बड़े छात्रावास बनाने की योजना को हरी झंडी दी जा चुकी है. इस अवसर पर मप्र कैबिनेट के लगभग सभी प्रमुख मंत्री उपस्थित थे.

दलितों के लिए बाँटे जाने वाले धन की मात्रा को देखते हुए यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि “मामाजी” अब पूरी तरह 2018 के चुनावी मूड में आ चुके हैं, जबकि उधर कॉंग्रेस को आपसी सिर-फुटव्वल से ही फुर्सत नहीं है, चुनावों को मात्र एक-डेढ़ वर्ष बचा है और अब कांग्रेस ने मप्र में अपना अध्यक्ष ही बदल दिया है. बसपा और आम आदमी पार्टी का कोई विशेष जनाधार नहीं है, इस दृष्टि से शिवराज मामाजी के लिए मैदान लगभग खाली है, उन्हें अकेले ही दौड़ना है और जीतना सुनिश्चित है. यह मध्यप्रदेश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि पिछले लगभग दस वर्षों से यहाँ सशक्त विपक्ष है ही नहीं. सवर्ण कर्मचारी संघ (सपाक्स) की माँगें धूल खा रही हैं और हाईकोर्ट-सुप्रीमकोर्ट तक खुद मप्र सरकार इनसे लड़ने में लगी हुई है... सारा मामला वोट बैंक और संख्या का है और इसीलिए सरकारें हमेशा दलितों और मुस्लिमों की ही सुनती हैं, उन्हीं को मोटा माल दिया जाता है, बाकी की बिखरी हुई जनता का कोई मोल नहीं है.

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