वामपंथ द्वारा एक और दलित संघ कार्यकर्ता की हत्या

परसों रात को केरल में एक और संघ कार्यकर्ता की हत्या वामपंथियों के हत्यारे कैडर द्वारा कर दी गई. त्रिचूर निवासी बीस वर्षीय निर्मल नामक दलित लड़का, जो कि संघ और ABVP का कार्यकर्ता भी था, परसों रात मंदिर से वापस घर लौट रहा था, रास्ते में वामपंथियों द्वारा उसे घेर कर मार दिया गया. उसके साथ थॉमस नाम का एक लड़का भी था, जो गंभीर रूप से घायल है.

पिछले माह ही एक अन्य संघ कार्यकर्ता संतोष की हत्या कन्नूर जिले में हुई थी, उस समय भी राज्य भाजपा द्वारा केवल केरल बन्द का आयोजन करके औपचारिकता निभा ली गई थी, इस बार भी केरल भाजपा इकाई ने केरल बन्द का आव्हान किया है. जब से वामपंथी पिनरई विजयन मुख्यमंत्री बने हैं, तभी से भाजपा-संघ के कार्यकर्ताओं की हत्या में तेजी आई है. पिछली काँग्रेस सरकार के समय कम से कम पुलिस जाँच का नाटक तो करती भी थी, लेकिन इस वामपंथी सरकार में तो पुलिस FIR भी दर्ज नहीं करती.

सवाल ये है कि केन्द्र सरकार कब तक बंगाल और केरल की घटनाओं पर चुप्पी साधे रहेगी? बंगाल में इस्लामिक खौफ और केरल में वामपंथी खौफ के बीच में संघ-भाजपा कार्यकर्ताओं के दुःख की आवाज़ केन्द्र तक कब पहुँचेगी?? रही बात तथाकथित “दलित चिंतकों” अथवा “दलितों के नाम पर रोटी-बोटी चबाने वालों की, तो उनके लिए “संघ कार्यकर्ता” दलित नहीं होता.

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