बेनामी संपत्ति और कालेधन पर चाबुक शुरू...

विमुद्रीकरण के पचास दिनों के दौरान खुद को बहुत चतुर खिलाड़ी समझने वाले बहुत से उद्योगपतियों-अफसरों ने अपने कालेधन को ठिकाने लगाने के लिए कई प्रकार के खेल रचे, बैंकों में साँठगाँठ की और अपनी बेनामी संपत्तियों को बचाने की कई जुगत लगाई. लेकिन प्रधानमंत्री के कठोर निर्देशों और निरंतर निगरानी के कारण एक जनवरी के बाद से आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने बैंकों से प्राप्त जानकारी तथा ख़ुफ़िया सूत्रों द्वारा मिली टिप्स के आधार पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. हाल ही में सीबीआई और आयकर विभाग ने 87 नोटिस जारी किए हैं, जिसमें 42 मामले स्पष्ट रूप से करोड़ों रूपए की हेराफेरी के दिखाई दे रहे हैं. इन नोटिसों में से कुछ रिटायर आईएस अफसर, एक पेपर मिल मालिक तथा कुछ शिक्षा माफिया के लोग शामिल हैं. 

पेपर मिल मालिक और कर्मचारियों के खातों की जाँच से पता चला कि मिल मालिक ने अपने 780 कर्मचारियों के खातों में करोड़ों रूपए जमा किए हैं और उन्हें “अग्रिम वेतन” के रूप में दर्शाया है. इसी प्रकार कुछ मेडिकल कॉलेजों और इन्जीनियरिंग कॉलेजों के मालिकों ने अपने शिक्षकों को ढाई-ढाई लाख रूपए का “अग्रिम वेतन” बाँट रखा है. बेनामी संपत्ति पर नकेल कसने के लिए बने क़ानून की पकड़ में झारखंड के एक मंत्री महोदय भी आ गए हैं और उन्हें सात वर्ष की जेल होने जा रही है. सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय अब बड़े शहरों की संपत्ति के कागजों की जाँच में लगे हैं, उसमें हरियाणा के कोई भूतपूर्व अफसर पकड़ में आए हैं, जिनके मुम्बई में ग्यारह फ़्लैट हैं. बेनामी संपत्ति क़ानून 1988 में ही लागू हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी सरकार ने इसे सख्ती से लागू नहीं किया था. इसमें 25% जुर्माने तथा सात वर्ष के सश्रम कारावास का प्रावधान है. पाँच राज्यों का चुनाव सम्पन्न होने तथा बजट सत्र के शांतिपूर्ण निपट जाने के बाद मोदी का अगला “सर्जिकल स्ट्राईक” बेनामी संपत्ति पर ही होने वाला है...

इंतज़ार कीजिए... सबका नंबर आएगा... सबको मिर्च लगेगी... असहिष्णुता दिखेगी...

Tags: desiCNN, Benami Property Act, Demonetization and CBI, ED Notices on Black Money

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