क्या यह करने से मुस्लिम भाजपा से प्रसन्न होंगे??

जब से नरेंद्र मोदी सरकार केंद्र में सत्ता में आई है, तभी से विपक्षी दल देश के मुस्लिमों को डराने-धमकाने में लगे हुए हैं कि मोदी मस्जिदों पर ताले लगवा देंगे, मोदी मदरसों को तबाह कर देंगे, मोदी दंगे करवा देंगे... इत्यादि-इत्यादि-इत्यादि... 

लेकिन वास्तविकता बिलकुल इसके उलट हो रही है. जहां एक तरफ नरेंद्र मोदी मुस्लिमों का विश्वास जीतने की कोशिश में लगातार मुस्लिमों की शिक्षा और रोजगार के लिए नई-नई योजनाएँ ला रहे हैं, वहीं उर्दू को बढ़ावा देने के लिए अलीगढ़ विवि तथा उर्दू विवि के लिए अतिरिक्त फंड की व्यवस्था भी की गई है. अब नरेंद्र मोदी अपने इस तीसरे बजट में एक कदम और आगे बढ़ गए हैं. इस वर्ष के केन्द्रीय बजट में "योजना व्यय" के मद में मदरसों, उर्दू शिक्षा एवं अल्पसंख्यक कल्याण के लिए मोदी सरकार ने पूरे 2815 करोड़ रूपए रखे हैं. जबकि भारी उद्योग, मझोले उद्योग, कपड़ा और पर्यटन के लिए इससे भी कम अर्थात 2154 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है.

इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि UPA सरकार के मुकाबले मोदी सरकार मुस्लिमों के प्रति ईमानदारी से अपना काम कर रही है. नरेंद्र मोदी ने मुस्लिम खातूनों की माँग पर तीन तलाक के मुद्दे पर भी सकारात्मक पहल की है, जिसे मौलवी पसंद नहीं कर रहे हैं, परन्तु मुस्लिम महिलाओं में इस मुद्दे पर मोदी की ईमानदारी और प्रतिबद्धता के चर्चे हैं. इसी प्रकार तीन वर्षों के राज्यवार आंकड़े भी देखे जाएँ तो साफ़ दिखाई देता है कि हिन्दू-मुस्लिम दंगों की संख्या UPA शासनकाल के मुकाबले कम हुई है.

सवाल यह उठता है कि मोदी सरकार द्वारा मुस्लिमों के लिए उठाए गए ऐसे क़दमों से क्या उनमें विश्वास जागेगा? कहीं मोदी सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम "नेकी कर और दरिया में डाल" जैसे तो न हो जाएँगे? उद्योगों, पर्यटन जैसे महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों के मुकाबले मदरसों को अधिक पैसा मुहैया करवाने का कोई राजनैतिक फल यूपी चुनावों में मिलेगा?? देखते हैं... वक्त ही बताएगा...

Tags: desiCNN, Budget allocation for Minority, Muslims are not minority in India, Fund for Madarsa, Minority Schemes by Modi

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