समाचार पत्रों में लगातार गौरक्षा के लिए हिंसक दुर्घटना की खबरें आती रहती हैं। गौ-भक्तों द्वारा गौ-तस्करी को रोकने के प्रयासों में अक्सर हिंसक घटनाएं हो जातीं हैं। साथ ही अनेक गौ-रक्षकों का बलिदान भी ऐसी घटनाओं में हर वर्ष होता रहता है जबकि अनेक बार गौ-तस्कर भी हिंसा में मारे जाते हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की आगामी 10 फरवरी को फिलिस्तीन (Palestine and India) यात्रा संभावित है. यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब इजरायली प्रधानमंत्री श्री नेतन्याहू का अति महत्वपूर्ण 6 दिवसीय भारत दौरा (Indo-Israel Relations) बस हुआ ही है. ऐसे में मोदी की फिलिस्तीन यात्रा के अनेक कयास लगाए जा रहे हैं. कुछ इसे दक्षिण एशियाई देशो से संतुलन साधने तो कुछ मुस्लिम तुष्टिकरण (Muslim Vote Bank) से जोड़ रहे हैं.

भारत में क्या लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव (Parliament Elections in India) एक साथ होने चाहिए। इस सवाल को अब फिर से हवा मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक इंटरव्यू में इस बात को और भी साफ़ कर दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावों को त्योहार खासकर होली की तरह होना चाहिए।

मीडिया में गुजरात के ऊना की घटना पर अपने आपको बुद्धिजीवी कहने वाली जमात हिन्दुओं को जातिवादी, अत्याचारी, मनुवादी, ब्राह्मणवादी न जाने क्या क्या कह चिल्लाई।

अपनी बात शुरू करूं इससे पहले यह स्पष्ट कह देना चाहता हूं कि अपने लिए न तो चेलमेश्वर (Justice Chelmeshwar) समूह कोई भगवान हैं, और न ही दीपक मिश्रा (Justice Deepak Mishra) को ही कोई क्लीन चिट देने का अपना कोई इरादा है. सच कहें तो इस पोस्ट का आशय चार जजों द्वारा उठाये गए मूल प्रकरण पर बात करने से है भी नहीं. अपन तो इस अप्रत्याशित घटना के बाद फेसबुक (Social Media Trial) पर छा गए समर्थन-विरोध और उसके तरीके के प्रति बात करना चाह रहे हैं.

बाहर से आए इस्लामिक और तुर्क लुटेरों (Islamic Invaders in India) ने भारत के सोमनाथ मंदिर जैसे हजारों मंदिरों को लूटा और ध्वस्त किया है, यह इतिहास कोई नई बात नहीं है.

यदि आप सोचते हैं कि फेसबुक पर लिखने से कुछ नहीं होता, तो कुछ मित्रों की इस संघर्ष गाथा को पढ़िए. भारत के वास्तविक इतिहास के साथ रोमिला थापर छाप “नकली इतिहासकारों” (Fake Historians) ने जो कुकर्म किए हैं, उसे बदलने के लिए पिछले साढ़े तीन वर्ष से ललित मिश्रा और CA अनूप कुमार शर्मा के नेतृत्व में कुछ विद्वानों ने एक समूह बनाकर लगातार मोदी सरकार का पीछा किया, और अंततः लम्बे इंतज़ार के बाद इसे हासिल किया.

पिछले भाग में आपने पढ़ा कि किस तरह इस्लामी आक्रान्ताओं ने औरतों को बंधक बनाकर, उनके साथ बलात्कार करके तथा एक समुदाय विशेष के लोगों के समक्ष उन ऐशगाहों में स्थित शौचालयों (Toilet System) की सफाई करने अथवा धर्म परिवर्तन करने हेतु दबाव बनाया गया. (पिछला भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें...). इसी इतिहास से जुड़े कुछ और सवाल ऐसे हैं, जो सहज स्वरूप में ही उठते हैं, उन पर भी विचार किया जाना आवश्यक है.

भारतवर्ष अब शौचालय क्रान्ति (Swachchh Bharat Abhiyan) की ओर नए कदम बढा चुका है. शौचालय हर खास-ओ-आम व्यक्ति के जीवन का अभिन्न और अहम हिस्सा बन चुका है.

सबसे पहले टेवेर्नियर (Tavernier) के बारे में... यह व्यक्ति एक फ्रांसीसी यात्री था, जिसने 1630 से 1668 के बीच ईरान और भारत की 6 बार यात्रा की थी, और वह भारत में एक लाख 20 हजार मील से अधिक घूमा.