Journey of Srila Prabhupada, ISKCON and Bhagvad Gita 

श्रील प्रभुपाद (Srila Prabhupada) पिछली शताब्दी के उन मुट्ठी भर आध्यात्मिक संतों में से एक हैं, जिनका जीवन और कर्तृत्व आगे आने वाले युगों-युगों तक युवाओं को प्रेरणा देता रहेगा।

राजस्थान के ऐसा राज्य है जिसमे बहुत सी रियासते थी जिनका आजादी के बाद भारत मे विलय हुवा था केवल जोधपुर को छोड़ दिया जाए तो बाकी किसी रियासत के मामले में ज्यादा आपत्ति नही आई थी क्यों?

इसी वर्ष 18 मई 2017 को भारत के तत्कालीन पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे जी का स्वर्गवास हुआ था. अनिल माधव दवे (Anil Madhav Dave) की कर्मभूमि मध्यप्रदेश रही है.

किसी भी सरकार में वित्त, रक्षा, गृह और विदेश मंत्रालय के बाद दो सबसे महत्त्वपूर्ण मंत्रालय होते हैं, मानव संसाधन और सूचना प्रसारण मंत्रालय (Information and Broadcasting Ministry). पिछली सरकारों खासकर वामपंथ समर्थित काँग्रेस सरकारों ने इन दोनों ही मंत्रालयों का जनता को अपने पक्ष में मोड़ने, तथा पाठ्यक्रमों व इतिहास में मनमाने बदलाव करके ब्रेनवॉश करने के लिए बेहतरीन उपयोग किया है.

खाद्य सुरक्षा बिल और गरीबों के लिए चलने वाली सस्ते अनाज की तमाम योजनाओं (Food Security Scheme) के बारे में अक्सर विमर्श होता रहता है. अधिकाँश बार यही निकलकर आया है, कि ऐसी योजनाएँ भ्रष्टाचारी लोगों का अड्डा बनी हुई हैं.

पाठकगण अक्सर यह सोचते होंगे कि भारत में "नव-बौद्धों" को ब्राह्मणों के खिलाफ क्यों भडकाया जा रहा है? साथ ही यह प्रश्न भी उनके मन में उठते होंगे कि आखिर म्यांमार के बौद्ध, इस्लाम के खिलाफ इतने आक्रामक क्यों हो गए, जबकि भारत में बौद्ध धर्मावलंबियों को बरगलाने में इस्लामी प्रचारक और वेटिकन सबसे आगे क्यों रहते हैं?? इन जैसे सवालों का जवाब इस लेख में संक्षिप्त रूप से दिया गया है... आगे पढ़िए.

कणकवली रेलवे स्टेशन से मुम्बई यात्रा करते समय अथवा वहाँ से वापस आते समय स्टेशन की सीढ़ियों के पास श्री मधु दण्डवते (Madhu Dandavate) का जो तैलचित्र लगा हुआ है, मैं सदैव उसे दोनों हाथ जोड़कर नमस्कार करके ही आगे बढ़ता हूँ.

अक्सर आपने कुछ "कथित इतिहासकारों" के मुँह से यह सुना होगा, कि "भारत तो कभी एक राष्ट्र था ही नहीं...", "यह तो टुकड़ों में बंटा हुआ एक भूभाग है, जिसे जबरन राष्ट्रवाद के नाम पर एक रखने का प्रयास किया जाता है...".

 पिछले भाग में आपने पढ़ा (यहाँ क्लिक करके पिछले भाग पढ़ा जा सकता है) कि किस तरह भारत में इस्लामिक पार्टियों, संस्थाओं और जिन्ना ने गाँधी-नेहरू को बेवकूफ बनाकर पाकिस्तान बनाने की नींव 1909 में ही रखनी शुरू कर दी थी.

भारत का बँटवारा एक कटु ऐतिहासिक सत्य है. 1947 में भारत छोड़कर जाने से पहले अंग्रेज भारत के कई टुकड़े (Partition of India) करके गए थे. सीमाओं के दोनों तरफ भीषण खूनखराबा हुआ था और अंततः मुसलमानों को उनका अपना एक देश “पाकिस्तान” के रूप में मिला.