हम हिन्दू किसे कहेंगे..? जो गीता जानता हो, रामायण – महाभारत जानता हो, वह..? तो फिर ऐसे अनेक हैं, जो ना तो गीता जानते हैं, और ना ही रामायण – महाभारत. फिर भी वह हिन्दू हैं..! फिर जो रोज भगवान् की पूजा करते हैं, वे हिन्दू हैं..? वैसे भी नहीं.

मध्यप्रदेश के नाम एक अभूतपूर्व घोटाला है, जिसका नाम है “व्यापमं घोटाला”. अब तक इसके बारे में लगभग सभी लोग जान चुके हैं, अब तो यह इंटरनेशनल स्तर तक भी पहुँच चुका है.

कलकत्ता में दुर्गा पूजा बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है. यह त्यौहार इतना भव्य तरीके से मनाया जाता है कि भारत के विभिन्न प्रान्तों से बड़ी संख्या में लोग इसको देखने आते हैं.

पश्चिमी विचारक मारिया विर्थ का यह लेख भारत के कई क्षेत्रों में पसंद और कई में नापसंद किया जाएगा, क्योंकि इसमें उन्होंने भारत की जाति-व्यवस्था को तोड़ने तथा ब्राह्मणों पर आए दिन होने वाले वैचारिक हमलों की पूरी पोल खोल दी है.

कुछ दिनों पूर्व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय काफी सुर्ख़ियों में रहा था. वहाँ की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना ने इतना भीषण रूप लिया कि मामला आग की तरह फैला, मीडिया भी इसमें घुस आया, राजनीति भी इसमें खेली गयी और प्रशासन असहाय जैसा दिखाई दिया.

पिछले भाग में आपने अकबर की क्रूरता, वासना और हत्यारी इस्लामिक मानसिकता के बारे में पढ़ा... (पिछला लेख पढने के लिए यहाँ क्लिक करें).... इसी के अगले भाग में हम आपको अकबर की कुछ और असलियतें बताएँगे.

बचपन से लेकर आज तक लगभग हम सभी ने अपनी-अपनी इतिहास की पुस्तकों में कई मुग़ल बादशाहों की “महानता”, “दयालुता” के चिकने-चुपड़े किस्से पढ़े हैं, सुने हैं. विभिन्न पुस्तकों में मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर को “दीन-इ-इलाही” नामक पंथ का आविष्कारक भी बताया गया है, और हमारे दिमागों में ठूँस-ठूँस कर यह भरा गया है कि अकबर हो या औरंगज़ेब ये सभी मुग़ल बादशाह बहुत ही कोमल हृदय वाले और हिन्दुओं के साथ न्यायप्रिय व्यवहार करने वाले थे. परन्तु क्या वास्तव में ऐसा है??

भारत के सबसे बड़े बैंक अर्थात भारतीय स्टेट बैंक जिसे सभी लोग SBI के नाम से जानते हैं, को अंततः सोशल मीडिया के दबाव में आकर झुकना ही पड़ा.

सन् 1982 में अजय शर्मा की आयु 19 वर्ष थी और वे बी.एससी. (द्वितीय वर्ष) के छात्र थे. उस समय अजय शर्मा ने प्रोफैसर से क्लास में कहा कि 2266 वर्ष पुराने आर्किमिडीज के सिद्वान्त, 311 वर्ष पुराने न्यूटन के नियमों और 112 वर्ष पुराने आइस्टीन के सिद्धांतों और सूत्रों में संशोधन होना चाहिए.

मैं आज एक गंभीर पत्र अपने देशवासी मुसलमानों को विशेष रूप से और विश्व भर के मुसलमानों को सामान्य रूप से लिख रहा हूँ. संभव है मैं जिन मुसलमान बंधुओं से बात करना चाहता हूँ उन तक मेरा ये पत्र सीधे न पहुंचे अतः आप सभी से निवेदन करता हूँ कि कृपया मेरे पत्र या इसके आशय को मुस्लिम मित्रों तक पहुंचाइये.

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