अक्सर आपने कुछ "कथित इतिहासकारों" के मुँह से यह सुना होगा, कि "भारत तो कभी एक राष्ट्र था ही नहीं...", "यह तो टुकड़ों में बंटा हुआ एक भूभाग है, जिसे जबरन राष्ट्रवाद के नाम पर एक रखने का प्रयास किया जाता है...".

 पिछले भाग में आपने पढ़ा (यहाँ क्लिक करके पिछले भाग पढ़ा जा सकता है) कि किस तरह भारत में इस्लामिक पार्टियों, संस्थाओं और जिन्ना ने गाँधी-नेहरू को बेवकूफ बनाकर पाकिस्तान बनाने की नींव 1909 में ही रखनी शुरू कर दी थी.

भारत का बँटवारा एक कटु ऐतिहासिक सत्य है. 1947 में भारत छोड़कर जाने से पहले अंग्रेज भारत के कई टुकड़े (Partition of India) करके गए थे. सीमाओं के दोनों तरफ भीषण खूनखराबा हुआ था और अंततः मुसलमानों को उनका अपना एक देश “पाकिस्तान” के रूप में मिला.

सबसे पहले कुछ पंक्तियाँ उन पाठकों के लिए, जिन्हें बांद्रा स्टेशन (Bandra Railway Station) के बारे में जानकारी नहीं है. मुम्बई में स्थित बांद्रा रेलवे स्टेशन, दादर एवं मुम्बई सेन्ट्रल (Mumbai Central) स्टेशन पर पड़ने वाले ट्रेनों के दबाव को कम करने के लिए एक अतिरिक्त टर्मिनस स्टेशन के रूप में विकसित किया गया था, यह स्टेशन पश्चिम रेलवे के अंतर्गत आता है.

देश की मुख्य धरती से बहुत दूर स्थित अंडमान द्वीप पर स्थित सेल्युलर जेल (Cellular Jail of Andaman) बहुत कुख्यात थी. हालाँकि सावरकर बंधुओं की वजह से अब यह जेल एक “तीर्थस्थल” बन चुकी है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इस जेल का नाम सुनकर ही कैदियों की तबियत खराब हो जाया करती थी.

एक कल्पना कीजिए... तीस वर्ष का पति जेल की सलाखों के भीतर खड़ा है और बाहर उसकी वह युवा पत्नी खड़ी है, जिसका बच्चा हाल ही में मृत हुआ है...

पैगंबरवासी क्रान्तिकारी हुतात्मा शायर अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ का जन्म उत्तर प्रदेश के शहीदगढ शाहजहाँपुर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित कदनखैल जलालनगर मुहल्ले में 22 अक्टूबर 1900 को हुआ था।

भारत में सबसे पहले हवाई जहाज़ उड़ाने वाला पायलट (First Indian Pilot) कौन था, इस बारे में सवाल पूछने पर सामान्यतः JRD Tata का नाम सामने आता है. लेकिन क्या यह सच है??

भारत के इतिहास में कई प्रकार के काले पन्ने भी दर्ज हैं. इन्हीं काले पन्नों में से एक है, बाकायदा सरकारी आदेश पर संसद भवन के सामने दिनदहाड़े, सरेआम सैकड़ों लोगों की हत्या. और ये लोग कौन थे? कोई आतंकी संगठन वाले, या उत्पाती, अथवा सरकारी संपत्ति लूटपाट या नाश करने वाले?? नहीं!!!

सनातन धर्म को लेकर इससे ईर्ष्या-द्वेष करने वाले विधर्मी कई बातों को लेकर सामान्य लोगों में भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास सतत करते रहते हैं. जैसे कि यह झूठ फैलाया जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में गौमांस खाया जाता था, अथवा वैदिक काल में सनातन धर्मी ऋषि-मुनियों ने सारा ज्ञान अपने पास छिपाकर रखा, गरीबों-वंचितों को नहीं दिया इत्यादि.

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