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असम ब्रह्मपुत्र नदी और घने जंगलों का सुन्दर प्रदेश चिरकाल से हिन्दू राजाओं द्वारा शासित प्रदेश रहा है। असम में इस्लाम ने सबसे पहली दस्तक बख्तियार खिलजी के रूप में 13 वीं शताब्दी में दी थी।

घटनास्थल : दक्षिण मेक्सिको का ओक्साका शहर... पादरी का नाम जोस गार्सिया अटाल्फो...

काफी समय से राष्ट्रीय विमर्श से गायब रहे नक्सली सुकमा में लगातार दो हमलों के बाद फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। नक्सलवादियों की यही रणनीति भी है कि बीच बीच में इस तरह की क्रूर हिंसात्मक गतिविधियों द्वारा देश को झकझोरते रहें।

हमारे देश में पढ़ाई जाने वाली किसी भी इतिहास पुस्तक को उठाकर देखिये। वास्को दी गामा को भारत की खोज करने का श्रेय देते हुए इतिहासकार उसके गुणगान करते दिखेंगे। उस काल में जब यूरोप से भारत के मध्य व्यापार, केवल अरब के माध्यम से होता था। उस पर अरबवासियों का प्रभुत्व था।

फिल्मी Cliché कभी कभी बहुत काम की बातें कर डालते हैं. कम से कम भूमिका बांधने के काम आते हैं. ऐसा ही एक Cliché है स्पाइडर मैन का संवाद - "With Great Power, comes great responsibility". अब यह अपने किस काम का?

भारत विश्व का संभवत एक मात्र ऐसा देश होगा जहाँ का इतिहास उस देश के इतिहासकारों ने नहीं अपितु विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है। इन पक्षपाती इतिहासकारों ने गौरी , गजनी और अकबर को महान लिखकर भारतीयों को हीन भावना से ग्रस्त करने का प्रयास किया।

क्या आप ब्राह्मण हैं?? क्या आपको अपना इतिहास ज्ञात है? क्या आधुनिक भारत में ब्राह्मणों की दुर्दशा तर्कसंगत है? आईये आज मै आपको प्रसिद्ध लेखक श्री अश्विनी जी के लेख द्वारा आपके समक्ष ब्राह्मणों का गौरवशाली एवं सत्कार्य युक्त इतिहास आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूं, आप भी पढ़े और अपने परिचितों को भी पढ़ाएँ.

ईसाई समाज शिक्षित समाज रहा है। इसलिए वह कोई भी कार्य रणनीति के बिना नहीं करता। बड़ी सोच एवं अनुभव के आधार पर ईसाईयों ने अपनी प्रचार नीति अपनाई है। ईसाईयों के धर्मान्तरण करने की प्रक्रिया तीन चरणों में होती हैं।

मध्यप्रदेश के बैतूल से सांसद ज्योति धुर्वे का जाति प्रमाणपत्र जाँच के बाद फर्जी पाया गया है. उल्लेखनीय है कि आदिवासियों की बहुलता के कारण बैतूल लोकसभा “अनुसूचित जनजाति” (ST) के लिए आरक्षित है.

आधुनिक और तथाकथित प्रगतिशील विद्वानों का सबसे प्रमुख शगल है "स्त्री विमर्श"। विषय कोई-सा भी हो, स्त्रियों का मुद्दा उसमें जोड़ ही दिया जाता है। राजनीति से लेकर सेना तक और शिक्षा से लेकर व्यवसाय तक स्त्रियों को प्रमुखता देने, उनके प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की बात की जाती है।

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