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सहारनपुर में दलितों और ठाकुर राजपूतों का विवाद का समाचार मिल रहा है। कभी दलित कहते है कि हम इस्लाम स्वीकार कर लेंगे, कभी ठाकुर कहते है कि हम इस्लाम स्वीकार कर लेंगे। इस्लाम स्वीकार करने से जातिवाद की समस्या समाप्त हो जाती तब तो दुनिया के सभी इस्लामिक देश जन्नत के समान होते।

क्या आपने किसी इलाके में रियल एस्टेट, यानि जमीन, फ्लैट के दाम गिरते हुए देखे हैं? अगर नहीं देखे तो एक बार दिल्ली के विकासपुरी और द्वारका सेक्टर 3 जैसी जगहों पर पिछले साल की कीमत और अभी की कीमत देखिये|

बीते दिनों ब्रिटेन के मैनचेस्टर शहर में एक म्यूज़िक कंसर्ट में आतंकी हमला हुआ, जिसमें कई लोग मारे गये। जो हुआ, वह यकीनन दुःखद है। हालाँकि दूसरा पहलू देखें तो इस घटना में आश्चर्य कैसा?

CIA की एक रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि चीन ने 2010 से लेकर अभी तक अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के दर्जनों जासूसों को या तो मार दिया है, अथवा बंदी बना लिया है.

आपने अक्सर पाया होगा कि देश के “कथित नेशनल मीडिया” परिदृश्य से उड़ीसा अक्सर गायब रहता है. जैसी ख़बरें और चटपटे वाद-विवाद राष्ट्रीय फलक पर बिहार, उत्तरप्रदेश अथवा दिल्ली या कश्मीर के बारे में देखे-सुने और पढ़े जाते हैं, उसके मुकाबले में उड़ीसा की घटनाएँ अथवा उसके बारे में जानकारी बहुत ही कम प्रसारित होती है, उड़ीसा लगभग पृष्ठभूमि में ही रहता है.

19 मई को नई दिल्ली स्थित पत्रकारिता के सर्वोच्च संस्थान आईआईएमसी (IIMC) में मीडिया स्कैन पत्रिका द्वारा "मीडिया और मिथ" इस विषय पर एक सेमिनार का आयोजन करवाया गया| इस कार्यक्रम में दो नई शुरुआत हुई - कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन की बजाए हवन से हुआ, तथा दूसरा महत्वपूर्ण बदलाव अभिनंदन को लेकर था - आने वाले मेहमानों का अभिनंदन ‘बुके’ की जगह ‘बुक’ देकर किया गया| 

मेरठ नगर निगम में कुछ मुस्लिम पार्षदों ने सत्र के दौरान वन्दे मातरम के गान के समय राष्ट्रीय गीत का बहिष्कार यह कहकर कर दिया गया कि वन्दे मातरम का गान करना इस्लाम की मान्यताओं के खिलाफ है और वे करोड़ो मुसलमानों की भावनाओं से खिलवाड़ नहीं कर सकते।

धर्म शब्द को लेकर संसार में बहुत भ्रांतियां फैल रही है। यूँ कहिये संसार में धर्म की सत्य परिभाषा को न समझकर मत-मतान्तर की संकीर्ण सोच को धर्म के रूप में चित्रित किया जा रहा है। विश्व में मुख्य रूप से ईसाई, इस्लाम और हिन्दू धर्म प्रचलित है।

नारी जाति के विषय में वेदों को लेकर अनेक भ्रांतियां हैं। भारतीय समाज में वेदों पर यह दोषारोपण किया जाता हैं की वेदों के कारण नारी जाति को सती प्रथा, बाल विवाह, देवदासी प्रथा, अशिक्षा, समाज में नीचा स्थान, विधवा का अभिशाप, नवजात कन्या की हत्या आदि अत्याचार हुए हैं।

मृत्यु एक अटल सत्य है. मृत्यु सभी को आनी है और इसे टाला नहीं जा सकता. सनातन धर्म में “पुनर्जन्म” की अवधारणा है. पुनर्जन्म के सम्बन्ध में कई बार, कई स्थानों पर जीवंत तथ्य एवं सबूत मिले हैं, जिसमें किसी बच्चे ने अपने पिछले जन्म की सभी प्रमुख घटनाओं को बाकायदा चिन्हित और लिपिबद्ध भी किया है.

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