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हाल ही में रिजर्व बैंक ने घोषणा की है कि वह 200 रूपए के नए नोट छापना आरम्भ कर चुका है और इन नोटों को जल्द ही बाज़ार में लाया जाएगा. अर्थात परदे के पीछे नरेंद्र मोदी की नोटबंदी के भाग-२ की पटकथा पूरी लिखी जा चुकी है.

भारतीय संस्कृति को नष्ट-भ्रष्ट करके भूमि पुत्र बहुसंख्यक हिंदुओं की आस्थाओं पर निरंतर प्रहार करते रहने की मुगलकालीन परंपरा अभी जीवित है। आज केंद्र में राष्ट्रवादी भाजपानीत राजग सरकार के सशक्त शासन में भी देशद्रोहियों व भारतविरोधियों के षड्यंत्रो पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।

हम सर्वप्रथम गणतंत्र और राजतंत्र में प्रचलित आय के और उसके स्वरुप की चर्चा करेंगे। आय न सिर्फ व्यक्ति संस्था के लिए अनिवार्य है बल्कि राजा, सामन्त के लिए भी उतना ही आवश्यक है। प्राचीन काल में व्यक्ति की आवश्यकताएँ पूरी हो जाती थीं लेकिन राज्य के लिए आय एक अभिन्न अंग था।

तीन बार इज़राईल की यात्रा कर चुके प्रशांत पोळ द्वारा उनके अनुभव एवं इज़राईल तथा यहूदियों के बारे में बयान किए गए कुछ तथ्य और अकाट्य बातें.. - मैं तीन बार इजराइल गया हूँ। तीनों बार अलग अलग रास्तों से। पहली बार लंदन से गया था। दूसरी बार पेरिस से। लेकिन तीसरी बार मुझे जाने का अवसर मिला, पडौसी राष्ट्र जॉर्डन से।

अगली बार जब भी आप भगवान् व्यंकटेश के दर्शनों के लिए तिरुपति जाएँगे तो आपकी जेब थोड़ी अधिक ढीली हो जाएगी. जी हाँ!!! अरुण “जेबलूटली” ने बीस लाख रूपए से ऊपर की आय वाले सभी मंदिरों पर GST लगा दिया है. इसलिए तिरुपति में हिन्दुओं के इस सबसे अमीर मंदिर पर तत्काल सौ करोड़ रूपए का टैक्स थोप दिया गया है.

भीड़ द्वारा हत्या जैसे “नकली विमर्श” गढ़कर विश्व पटल पर भारत को बदनाम करने वाले तथाकथित बुद्धिजीवियों के लिए कर्नाटक से एक खबर है.

हमने अक्सर देखा-सुना और पढ़ा है कि आए दिन हमारे माननीय न्यायाधीश महोदय, किसी प्रशासनिक अधिकारी को लताड़ते रहते हैं कि उसने अपने कर्त्तव्य का पालन सही तरीके से नहीं किया. न्यायाधीश महोदय की भावनाबेन भी गाहे-बगाहे आहत होती रहती है और वे जब-तब न्यायालय की मानहानि (Contempt of Court) के मामलों में जब चाहे जहाँ चाहे किसी को भी रगड़ते रहते हैं.

भाजपा पर अक्सर ये आरोप लगते रहे हैं कि जब भी यह पार्टी सत्ता में आती है तो अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को या तो भूल जाती है, या फिर उनकी उपेक्षा अथवा उनके साथ होने वाले अन्याय पर आँखें मूँद लेती है. कई कार्यकर्ताओं की यह व्यथा है कि उनकी सुनने वाला कोई नहीं.

इतिहास में अभी तक ऐसा कभी नहीं हुआ, जब हिन्दुओं ने अपना धर्मनिरपेक्ष या उदार चेहरा न दिखाया हो। वह हमेशा ही अपनी धार्मिक उदारता के कारण अपनी क्षति करता रहता है। हिन्दुओं ने अपनी उदारता के कारण हमेशा धोखा खाया है, और उसके साथ ही वह चर्च और अरब देशों से संचालित प्रोपोगैंडा का शिकार भी है।

सरस्वती नदी से सम्बंधित पिछले लेख (यहाँ क्लिक करके पढ़ा जा सकता है) में आपने इस नदी के इतिहास एवं इसकी पौराणिक उपस्थिति के बारे में जाना था. इस दूसरे भाग में आप जानिये कि स्वतंत्रता प्राप्ति से पहले से लेकर अभी तक इस नदी को पुनर्जीवित करने के क्या प्रयास हुए हैं और सरकारों तथा शोधकर्ताओं का इसमें कितना योगदान है. 

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