गंगा-जमुनी संस्कृति की दुहाई देते देते हुए कुछ लोगों के कंठ अवरुद्ध हो जाते हैं. अवरुद्ध होते कंठों से बहुत मुश्किल से आवाजें निकल पाती हैं. ये आवाजें बहुत ही सिलेक्टिव होती हैं. रोजों के समय न जाने कितने मंदिरों के द्वार नमाज के लिए खोल दिए जाते हैं, और उस समय गंगा जमुनी तहजीब जमकर हिलोरें ले रही होती है.

भारत के कई पाठकों को गत वर्ष यानी 2016 में उज्जैन में संपन्न हुए सिंहस्थ कुम्भ का स्मरण अवश्य होगा. इस सिंहस्थ कुम्भ में एक विशेष आकर्षण का केंद्र था “किन्नर अखाड़ा”. यानी जिसे हम अंगरेजी में “थर्ड जेंडर” भी कह सकते हैं.

जब से पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक आतंक की विभीषिका बढ़ी है, तभी से अक्सर यह सवाल कई बौद्धिक क्षेत्रों में उठाया जाता रहा है कि आखिर वह कौन सी शिक्षा है अथवा वह कौन सा ग्रन्थ या किताब है, जिससे प्रभावित होकर अथवा जिसे पढ़कर आतंकी बन रहे हैं.

हाल ही में भारत के सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े “तीन तलाक” के मुद्दे पर आधा-अधूरा ही सही, लेकिन एक शुरुआती फैसला सुनाया है. आधा-अधूरा इसलिए लिखा है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने केवल “एक साथ तीन तलाक बोलकर तलाक” देने को अवैध ठहराया है, लेकिन तीन माह में एक-एक बार तलाक बोलने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है.

पिछले कुछ समय से कई “हिन्दू” बाबा, प्रवचनकार, संत इत्यादि विभिन्न आरोपों में पकड़े जा रहे हैं या जेल जा रहे हैं. जब भी ऐसा कोई मौका आता है, तब वामपंथियों की पौ-बारह हो जाती है. ऐसे बाबाओं को लेकर अर्थात प्रकारांतर से हिन्दू धर्म को लेकर “वामी मज़हब” वाले लोग (जी हाँ!!! वामपंथ भी एक मज़हब है, इस्लाम से भी खतरनाक) हिंदुओं को कोसने लगते हैं कि “हिंदुओं के धर्म में वैज्ञानिकता नहीं है”...

मित्रों क्या आप 1500 वर्ष पुराने सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में खड़े बाणस्तम्भ की विलक्षणता के विषय मे जानते हैं? ‘इतिहास’ बडा चमत्कारी विषय है इसको खोजते खोजते हमारा सामना ऐसे स्थिति से होता है की हम आश्चर्य में पड जाते हैं! पहले हम स्वयं से पूछते हैं यह कैसे संभव है?

प्रिय रवीश जी, नमस्कार ...

कल आपकी पोस्ट पर मैंने कुछ प्रश्न किये थे. जबाब में आपकी ट्रोल आर्मी अभी तक मैदान में ऊटपटांग बकवास कर रही है. कुछ लोग तो सीधे इनबॉक्स में आ धमके हैं, पूछ रहे हैं मेरी क्वालिफिकेशन क्या है, आप जैसे मठाधीश पर सवाल उठाने की?

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के कार्यकर्ताओं से आव्हान किया है कि वे “दलितों को अपना वोट बैंक” बनाएँ. असल में उत्तरप्रदेश में जिस प्रकार मायावती अप्रासंगिक होती जा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर किसी भी पार्टी में कोई मजबूत, देशव्यापी अपील वाला दलित नेता मौजूद नहीं है.

स्मरण करने का प्रयास कीजिए, कि आपने पिछले दस वर्षों में हिन्दी फिल्मों में कितने भजन गीत देखे या सुने हैं? मस्तिष्क पर ज़ोर लगाना पड़ेगा ना!!! अच्छा उसे छोड़िये, यह याद करने का प्रयास कीजिये कि पिछले दस वर्षों में हिन्दी फिल्मों में आपने जन्माष्टमी, रामनवमी, महाशिवरात्रि से सम्बंधित कितने गीत सुने हैं??

72 वर्षीय बुज़ुर्ग मेहता जी इस बात को लेकर भौंचक और दुखी थे कि उनके द्वारा जीवन भर मेहनत करके कमाई गयी पूँजी अर्थात फिक्स्ड डिपोजिट (सावधि जमा) पर बैंकों ने ब्याज दर और घटा दी है.

न्यूज़ लैटर के लिए साइन अप करें