पाकिस्तान, सऊदी अरेबिया और ईरान ..........अगर ट्रम्प अपने कार्यकाल में केवल इन 3 मुल्ला देशों को तबाह कर दे तो उसका सारी दुनिया पे बहुत बड़ा अहसान होगा और इस्लामिक आतंकवाद की जडें उखड़ जायेंगीं और जैसा की महान मराठा योद्धा श्रीमंत बाजीराव पेशवा जी ने सूत्र दिया था की जड़ों पे प्रहार करो फिर पेड़ तथा पत्ते अपने आप गिर जायेंगें. 

संसार के सबसे भयानक नरसंहारों में सबसे बड़े नरसंहार ईसाइयों और इस्लामियों द्वारा हम मूर्तिपूजकों के हैं। जिन्हें उन्होंने चतुर भाषा में पैगन कहा है। इसके बाद ईसाइयों और मुसलमानों द्वारा ही यहूदियों के नरसंहार आते हैं।

शत्रु का शत्रु मित्र होता है इस सिद्धांत से अक्सर "वामी-इलहामी" कंधे से कंधा मिलाकर भारत के राष्ट्रवादीयों को निपटाने में तत्पर दिखाई देते हैं. वामियों को इलहमियों में कोई फासिस्ट प्रवृत्ति नजर नहीं आती, भगवे के अंधे को हरा अच्छा दिखाता होगा शायद.

सभाओं का शौक बचपन से है, जाते रहता हूँ. हाल ही में एक बार पता चला इंद्रेश कुमार जी मुंबई आनेवाले थे, मैं भी गया सभा में. अब बात उन्होने क्या कहा उसकी नहीं, अलग है. भाषणों के बाद कुछ मुस्लिम प्रश्न पूछने के लिए खड़े हुए. बात यहाँ उनके प्रश्नों की करूंगा, हिंदुओं के लिए उसमें सीख है.

यह घटना एक परिचित के साथ घटी थी, जब गृह प्रवेश के वक्त मित्रों ने नए घर की ख़ुशी में उपहार भेंट किए थे। उपहारों को खोलना शुरू किया तो उनके आश्चर्य का ठिकाना नहीं था. एक दो उपहारों को छोड़कर बाकी सभी में लाफिंग बुद्धा, फेंगशुई पिरामिड, चाइनीज़ ड्रेगन, कछुआ, चाइनीस फेंगसुई सिक्के, तीन टांगों वाला मेंढक, और हाथ हिलाती हुई बिल्ली जैसी अटपटी वस्तुएं भी दी गई थी।

आपने एमआईबी (मेन इन ब्लेक) देखी थी?? यह उन फिल्मो में से है जिसे मैं ने सिनेमा हाल जाकर देखी थी। फिर सीडी,डीवीडी,पेन ड्राइव का जमाना बदलता गया। अपने में बहुत नये कलेवर में आया था। 2 जुलाई 1997 को Barry Sonnenfeld द्वारा निर्देशित इस सीरीज की पहली फिल्म आई थी.

डॉनल्ड ट्रम्प ने 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों पर अमरीकी वीज़ा बंद क्या कर दिया कि संसार भर के लोगों के पेट में पानी होने लगा। दस्त लग गये मगर उन्हें बंद करने की दवा नहीं सूझ रही। अमरीका तक में मरोड़ें शुरू हो गयीं।

संघ शाखा की स्मृतियाँ...

Written by बुधवार, 01 फरवरी 2017 18:16

करीब दसियों साल पहले, एक मित्र RSS की एक शाखा का परिचय इस तरह करवाकर मुझे वहां ले गया कि "चलो, वहां लाठी चलाना, जूडो- कराटे सिखाते हैं". मैं उसके साथ गया, फिर करीब 5-6 साल सक्रिय स्वयंसेवक रहा, बहुत से लोगों से संपर्क हुआ, बहुत कुछ सीखा जाना, कबड्डी खेली, राष्ट्रवाद समझा,

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सबसे ज्यादा हल्ला वामपंथी ही करते हैं...और इससे बड़ा विद्रूप और कुछ नहीं हो सकता... स्टालिन के अपने शासन काल में कुल 2.7 करोड़ लोग बिलकुल गायब हो गए...कितनी ही ज़िन्दगियाँ साइबेरिया की गुमनामी में खो गयीं,

संजय भंसाली के समर्थन आये लोग उसके विरोध को पूर्वाग्रह से किया हुआ बता रहे है और उसके समर्थन में दो तरह के तर्क दे रहे है। एक यह की लोगो ने पद्मावती की पठकथा बिना देखे विरोध कर रहे है और दूसरा संजय भंसाली भारत के एक श्रेष्ट निर्देशक है जो बड़ी फिल्म बनाने में सिद्धस्त है, इस लिए उनको पूरी स्वतंत्रता है कि वह अपनी कला की किसी भी तरीके से अभिव्यक्त करे। मैं यह पहले तो एक बात साफ़ कर दूँ की संजय भंसाली का पद्मावती को लेकर फिल्म बनाने का विरोध भारतियों ने किया है न की किसी विचारधारा के अंतर्गत यह हुआ है। यहां लोग यह भूल जाते है की जिस करणी सेना ने भंसाली को झापड़ मारा है वह सेक्युलर कांग्रेस समर्थित है, उसका बीजेपी से कोई मतलब भी नही है इसलिए राजनीति इसमें नही घुसेडनी चाहिए। अब चलिए मुद्दे पर आते है।