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आजादी से पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप के विजय की चाभी अफगानिस्तान के हेरात व कंधार प्रांत को माना गया, जो खुरासान प्रदेश का दक्षिणी हिस्सा था। यही कारण रहा कि विदेशी आक्रांताओं के लिए खुरासान भारत विजय का मोड्यूल रहा।

भारत के स्वतन्त्र होने के पश्चात कई धुरंधर विद्वान एवं वैज्ञानिक सोच वाले व्यक्तियों ने इस राष्ट्र के निर्माण में महती भूमिका निभाई है. होमी भाभा, मेघनाद देसाई अथवा विक्रम साराभाई जैसे दिग्गजों के नाम काफी लोकप्रिय हैं और लगभग सभी लोग जानते हैं. ऐसे ही एक नींव के पत्थर हैं, श्री दौलतसिंह कोठारी... जिनके बारे में अधिक लोग नहीं जानते हैं,

कुछ झूठ ऐसे होते हैं, जो लम्बे समय तक सच मान लिए जाते हैं. इन्हीं में से एक झूठ यह है कि मोहम्मद अली जिन्ना “सेक्यूलर” थे और 1947 से पहले गांधी-नेहरू के साथ हुए सत्ता एवं शक्ति संघर्ष की राजनीति में हारने के कारण जिन्ना ने पाकिस्तान के निर्माण का दाँव चला. लेकिन यह सच नहीं है, “पाकिस्तान” नामक इस्लामिक शरिया देश की कल्पना 1947 से बहुत-बहुत पहले अर्थात 1937 में ही रखी जा चुकी थी.

चीन ने ओबोर की बात कर कर अंतरराष्ट्रीय जगत में एक नई हलचल पैदा कर दी है। OBOR यानी वन बेल्ट वन रोड, वन रोड यानी सिल्क रोड। यह बड़ी हैरतअंगेज बात है कि चीन ने एक रूट को रोड बना दिया।

एक समाचार के अनुसार केन्द्र सरकार के उपक्रम नेशनल पेमेंट्स कार्पोरेशन ऑफ इण्डिया (NCPI) ने गूगल और व्हाट्सएप्प को यह अनुमति प्रदान कर दी है, कि वे अपने मोबाईल एप्प से UPI अर्थात एकीकृत भुगतान प्रणाली या कहें सरकारी मोबाईल प्लेटफार्म को समाहित कर सकते हैं.

लगभग एक माह से अधिक होने को आया, बंगाल में इस्लामिक हिंसा और गोरखालैंड में अलग राज्य के माँग को लेकर समूचा उत्तर-पूर्व बेचैन और अशांत है. पिछले शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात को बंगाल पुलिस द्वारा तीन गोरखा प्रदर्शनकारियों को बड़ी निर्दयता से गोली मार दी.

श्रीरामचरित मानस संसार के सर्वश्रेष्ठ ग्रन्थों में से एक है। गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित इस ग्रन्थ में मानव जीवन के सभी प्रश्नों का उत्तर मिलता है। गोस्वामी जी ने अपने इस महान ग्रन्थ में समाज के प्रत्येक पक्ष का वर्णन किया है।

विगत दो दशकों में जब से टीवी जैसे माध्यम ने घरों के ड्राईंग रूमों और बेडरूमों में लगभग कब्ज़ा जमा लिया था, उसी दौर में बहुत से लोगों ने सोचा था कि शायद अब रेडियो के दिन लद गए. लेकिन वे कितने गलत थे, यह बात इसी से सिद्ध होती है, कि रेडियो स्टेशनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.

भारतवासियों ने आतंकी अफज़ल गूरू के समर्थन में नारे लगाने, उसे बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लगाने वालों के “बौद्धिक गिरोह” देखे हैं. इसी प्रकार याकूब को फाँसी से बचाने के लिए यही गिरोह आधी रात को कोर्ट खुलवाने में भी पीछे नहीं रहा है.

अधिकतर लोगों ने कौटिल्य अर्थात चाणक्य के "अर्थशास्त्र" के बारे में केवल सुना ही सुना है, पढ़ा शायद ही किसी ने हो. इस संक्षिप्त लेख में चाणक्य द्वारा लिखे गए सूत्रों, नियमों एवं अनुपालनों को समझाने का प्रयास किया गया है, ताकि दिमाग पर अधिक बोझ भी न पड़े और पूरा कौटिल्य अर्थशास्त्र सरलता से समझ में भी आ जाए.

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