अंततः सरकार ने एक और कठोर कदम उठाने का फैसला कर ही लिया है. जैसा कि सभी को ज्ञात है भारत में विश्वविद्यालयों के लिए एक नियामक संस्था है, जिसका नाम है UGC, अर्थात विश्वविद्यालय अनुदान आयोग. इसका बजट दस हजार करोड़ रूपए से अधिक है.

जैसा कि सभी जानते हैं वामपंथ का घोष वाक्य है “सत्ता बन्दूक की नली से निकलती है”. वामपंथ का कभी भी लोकतंत्र, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं, पद्धतियों, न्यायालयों अथवा चर्चाओं पर भरोसा नहीं रहा है. भारत के बंगाल में ज्योति बसु नामक व्यक्ति ने वामपंथ को बंगाल में ऊँचाईयों तक पहुंचाया और अपनी कुख्यात हिंसा और हिंसक कार्यकर्ताओं के सहारे तीस वर्ष तक बंगाल में शासन किया.

यदि राजा के हाथ में दण्ड (डंडा) है तो समाज के दुष्ट और अत्याचारी लोग अपनी असामाजिक गतिविधियों के प्रति शांत रहते हैं। किंतु यदि राजा देश की बहुसंख्यक जनसंख्या के साथ घृणित उपहास करते हुए कुछ लोगों की तुष्टि हेतु बहुसंख्यकों के हितों से समझौता करता है, अथवा उनकी उपेक्षा करता है तो राष्ट्र विनाश के भंवर जाल में फंस जाया करता है जैसा कि आज भारत में हो भी रहा है।

राजा जैनुल और श्रीभट्ट की समादरणीय जोड़ी जब कश्मीर में दो विपरीत दिशाओं में बहती सरिताओं-हिंदुत्व और इस्लाम को एक दिशा देने का अदभुत और प्रशंसनीय कार्य कर रही थी, तभी कहीं ‘शैतान’ उन अनोखे और प्रशंसनीय कार्यों को नष्ट करने के लिए उनकी जड़ों में मट्ठा डालने का कार्य भी कर रहा था। इस शैतान का उल्लेख इस्लामिक साहित्य में अक्सर मिलता है।

कोलकाता से 250 किमी दूर बीरभूम जिले में एक क़स्बा है, जिसका नाम है मोरग्राम. आज से बीस-पच्चीस वर्ष पहले यह क़स्बा चारों तरफ हरे-भरे धान के खेतों से महकता था, और इस गाँव में लगभग 280 हिन्दू परिवार रहते थे, जबकि मुस्लिम परिवारों की संख्या केवल 15 थी.

हमने बचपन में अकबर-बीरबल की कई कहानियाँ सूनी-पढी हैं, इन कहानियों में बताया जाता था कि किस प्रकार बीरबल नामक चतुर मंत्री अपने बादशाह अकबर को अपनी चतुराई और बातों से खुश कर देता था.

देश के पहले शिक्षा-मंत्री ''नुरुल-हसन, ने बड़ी चतुराई से भारतीय शिक्षा को सनातन चेतना के खिलाफ एक खतरनाक वेपन की तरह इस्तेमाल किया। शिक्षा जगत मे की गई यह हस्तक्षेप सबसे नया और खतरनाक हथियार के रूप मे सामने आई।

इतिहास में उल्लेख है कि राणा पूंजा भील का जन्म मेरपुर के मुखिया दूदा होलंकी के परिवार में हुआ था। उनकी माता का नाम केहरी बाई था, उनके पिता का देहांत होने के पश्चात 15 वर्ष की अल्पायु में उन्हें मेरपुर का मुखिया बना दिया गया।

अखिलेश, औरंगजेब और फिदायीन...

Written by मंगलवार, 07 फरवरी 2017 13:18

जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में अखिलेश ने मुलायम का किया है उसके बाद से अक्सर उन्हें औरंगज़ेब बुलाया जाने लगा है| शक्तिशाली मुग़ल शहंशाहों में औरंगजेब आखरी थे, उनके बाद के 12-13 मुग़ल शासक योग्य नहीं थे और अंत में बहादुर शाह जफ़र को अंग्रेजों ने दिल्ली की गद्दी से उतार फेंका था|

या अल्लाह... तुम तो हमें अकेले में चीखने दो और जोर जोर से रोने दो। कहीं एकान्त में हमारा दम ही न निकल जाए। बुरके की घुटन में लोक जीवन की चारदीवारी में हमें इतना जी भर के रो लेने दो कि हमारी आखों में एक भी आंसू बाकी न बचे।

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