क्या कभी आपने सोचा है कि हमारी अपनी संस्कृति पर अधिकार जताने के लिए हम क्यों विवश हैं? क्यों ग्लोबलाइजेशन व उदारवादी विश्व अर्थव्यवस्था के नाम पर अनाचार, अश्लील, अनैतिक व अवैध कार्यों को वैध बनाने की कुछ विकृत मानसिकता वाले लोगों व बहुराष्ट्रीय कम्पनियों की साजिश में हमें भागीदार बनाया जा रहा है?

इंटरनेट के कारण हिंदुस्तान में Cognitive Dissonance का सब से बड़ा मारा कोई है तो युवा मुसलमान है. वह जानता है कि अब सब जानते हैं कि जब उसके पुरखों ने इस्लाम कुबूल किया होगा, वह कोई बहुत गौरवशाली घटना नहीं होगी. वह जिनसे अपना संबंध बता रहा है, उनकी नजर में तो उसकी औकात धूल बराबर भी नहीं है यह भी सब जानते हैं. समाज के तथाकथित रहनुमाओं ने समाज को मजहब के नाम पर पिछड़ा रखा है, यह भी उसे पता है.

किसी भी समाज में विचार बरसों बरस के लिए कैसे स्थापित होते हैं इसको समझना है तो भारत में वामपंथ को समझिए , आज गंभीर "राष्ट्रवादियों" का एक बहुत बड़ा तबका वामपंथियों को कोसने में अपना समय खर्च करता है , क्यों ? क्या वामपंथी एक दो राज्य छोड़कर कहीं सत्ता में हैं ? क्या उनका कोई व्यापक जनाधार है ? क्या उनका काडर बेस है ? क्या यूवा उनके विचार की तरफ तरफ आकर्षित हैं ? नहीं , सबका जवाब नहीं में ही आएगा , ऐसा कुछ भी नहीं है फिर भी देश के केंद्र में और आधे राज्यों में राज करने वाली विचारधारा के लोग वामपंथ से भयाक्रांत हैं ? क्यों ?

नेहरू कभी नहीं चाहते थे कि डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद राष्ट्रपति बनें... पता नहीं क्यों नेहरू और प्रसाद के सम्बन्ध शुरू से ही अच्छे नहीं थे. शहरी छाप वाले नेहरू ने बिहार के सीधे-सादे गँवई राजेन्द्र प्रसाद को कभी भी उचित सम्मान नहीं दिया... आगे पढ़ें...

ओशो का वह प्रवचन, जिससे ईसाईयत तिलमिला उठी थी और अमेरिका की रोनाल्‍ड रीगन सरकार ने उन्‍हें हाथ-पैर में बेडि़यां डालकर गिरफ्तार किया और फिर मरने के लिए थेलियम नामक धीमा जहर दे दिया था। इतना ही नहीं, वहां बसे रजनीशपुरम को तबाह कर दिया गया था और पूरी दुनिया को यह निर्देश भी दे दिया था कि न तो ओशो को कोई देश आश्रय देगा और न ही उनके विमान को ही लैंडिंग की इजाजत दी जाएगी। ओशो से प्रवचनों की वह श्रृंखला आज भी मार्केट से गायब हैं। पढिए वह चौंकाने वाला सच...

केजरीवाल की मनोरोगी हरकतें

Written by बुधवार, 23 दिसम्बर 2015 18:52

श्री श्री श्री 1008 महामहिम, ट्वीटोपाध्याय, क्रांतिकारीभूषण, स्वराज-प्रतिपादक, झाडूधारी, IIT-दीक्षीत, सिनेमारिव्यू लेखक, सलीम उर्फ योगेंद्र मारक, 49 दिवसीय भगोड़े, निर्भया बलात्कारी-प्रेमी युगपुरुष उर्फ अरविंद केजरीवाल गुस्से में तमतमाते हुए घर पहुँचे... कोने में अपनी दिखावटी घिसी हुई चप्पलें फेंकी औरसोफे में अपना ईमानदार पिछवाड़ा लगभग पटक दिया.

इस देश में अल्पसंख्यकों (Minorities) और बहुसंख्यकों (Majority) का वैमर्शिक ताना बाना कितना बेमेल और बेडौल हो चुका है उसकी बानगी कभी कभी बहुत साधारण लोगों की बातचीत एक अजनबी के रूप में दूर से पढ़ने सुनने पर प्रतीत मिलती है !! 

‘सत्ता’ का असली अर्थ मुझे तब समझ में आया जब दिल्ली में मुझे 1994 में “संस्कृति सम्मान” पुरस्कार मिला .वहां स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में मैं दो दिनों तक रुका था.वैसे भी सूचना और संस्कृति मंत्रालयों से मेरा जुडाव तो था ही ,परन्तु इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) वो जगह है जहाँ 'सत्ता' सोने की चमकती थालियों में परोसी जाती है.

भारत में सूफीवाद बहुत पुराना है, लेकिन वास्तव में सूफीवाद की असलियत क्या है? सूफियों के इस्लामिक प्रचारक और मानसिक अफीम की पड़ताल करता यह बेहद मारक लेख पढ़िए...

शहीद और हुतात्मा शब्द का अंतर
 
 
शहीद शब्द को लेकर इस्लाम में एकदम स्पष्ट परिभाषा है, जबकि अज्ञानी एवं भोलेभाले हिंदुओं को जैसा पढ़ा-लिखा दिया जाता है, वे उसका पालन करने लग जाते हैं. ऐसा क्यों?? तो आईये पहले हम समझें “शहीद” और “हुतात्मा” शब्दों के बीच का अंतर...
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