जब कोई सेना बुरी तरह हारने लगती है और उसे दुम दबाकर पीछे की तरफ भागना होता है, तब अक्सर वह हारी हुई सेना वापस जाते-जाते अपनी खीझ और क्रोध उतारने के लिए लूटपाट, हत्याएँ करती हुई... गाँव उजाडती हुई भागती है.

जब हम थियेटर में मधुर भंडारकर की फिल्म देखने जाते हैं तो हमारे दिमाग में मधुर भंडारकर की ही छवि होती है. “चांदनी बार”, “ट्रेफिक सिग्नल”, “कारपोरेट” जैसी कई शानदार फ़िल्में देने वाले तथा अपनी फिल्मों में किसी हीरो-हीरोइन को हावी न होने देते हुए इस फिल्म माध्यम को “निर्देशक का माध्यम” सिद्ध करने वाले मधुर भंडारकर की हालिया फिल्म “इंदु सरकार” हाल ही में देखने को मिली.

सामान्यतः आज देश के विभिन्न भागों में बंग्लादेशी व पाक-परस्त ज़िहादी अनेक प्रकार से इस्लामिक आतंकवाद में लिप्त है, जिससे बढती हुई राष्ट्रिय व सामाजिक समस्याओं का किसी को अनुमान ही नहीं हो रहा है। क्योंकि भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सत्य सनातन संस्कृति और दर्शन को आज के छदम सेक्युलर केवल मैकाले व मार्क्सवाद की दृष्टि से देखने के आदी हो चुके है।

(यह लेख मूलतः नितिन श्रीधर ने लिखा है, और इसका हिन्दी अनुवाद अवतंस कुमार ने किया है)

इसके पहले वाले लेख में (उस लेख की लिंक यह है)... हमने दुनियाँ भर के विभिन्न मतों और संस्कृतियों में मासिक-धर्म से जुड़ी मान्यताओं और प्रचलनों पर विचार किया था।

प्राचीन भारत में हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वानों ने जनता को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए परम्पराओं में कई ऐसे खेल आविष्कार कर दिए थे, जिनके द्वारा न सिर्फ हिन्दुओं का युद्ध कौशल उभरकर सामने आता था, बल्कि शस्त्रों को पहचानने, उनके द्वारा सटीक हमला करने एवं उनसे बचाव करने की तकनीक भी व्यक्ति खेल-खेल में ही सीख जाता था.

हाल ही में एक प्रसिद्ध पत्रिका “आउटलुक” ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति केआर नारायणन अपने अंतिम समय से पहले हिन्दू दलित नहीं रह गए थे, बल्कि वे “कन्वर्टेड ईसाई” बन चुके थे.

सतनामियों के इतिहास के बारे में अधिकाँश लोग अंजान हैं. झारखंड, छत्तीसगढ़ और बंगाल के एक बड़े हिस्से में फैले लगभग एक करोड़ से अधिक सतनामी समुदाय वही हैं, जिन्होंने औरंगजेब द्वारा हिन्दुओं पर जजिया थोपने के इस्लामिक फैसले का कठोरतम विरोध किया था.

भारत की कई महत्त्वपूर्ण पुरातात्विक महत्त्व की बेशकीमती वस्तुएँ आज भी विदेशों के संग्रहालयों अथवा सरकारों के कब्जे में मौजूद हैं. इन अनमोल विरासतों के बारे में भारत सरकार के पास सबूत भी मौजूद हैं, परन्तु कुछ कानूनी एवं कुछ तकनीकी कारणों की वजह से भारत के ये गौरवशाली विरासत अभी भी भारत में नहीं आ पाई हैं. कोहिनूर हीरा तो खैर विश्वप्रसिद्ध है ही, उसी से मिलता-जुलता एक और हीरा है, जिसका नाम है “नासक”.

सृष्टि विज्ञान के दो पहलू हैं। पहला पहलू है कि सृष्टि क्या है? आधुनिक विज्ञान यह मानता है कि आज से 13.7 अरब वर्ष पहले बिग बैंग यानी कि महाविस्फोट हुआ था। उसके बाद जब भौतिकी की रचना हुई, अर्थात्, पदार्थ में लंबाई, चौड़ाई और गोलाई आई, वहाँ से विज्ञान की शुरुआत हुई। उससे पहले क्या हुआ, इस पर विज्ञान मौन है। क्योंकि भौतिकी की यह सीमा है।

कुछ तथाकथित दलित चिंतकों (असल में वेटिकन के गुर्गे) का सदा से आरोप रहता है कि मंदिरों में दलितों के साथ भेदभाव किया जाता है, उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं मिलता. हालाँकि यह बात पहले ही सिद्ध हो चुकी है कि यह केवल दुष्प्रचार भर है, क्योंकि देश के हज़ारों मंदिरों में से इक्का-दुक्का को छोड़कर किसी भी मंदिर में घुसते समय, किसी से उसकी जाति नहीं पूछी जाती है.