उत्तरप्रदेश में अवैध बूचड़खानों के खिलाफ योगी की सख्त कार्यवाही जारी है और उधर अवैध बूचड़खाने के मालिक, जिन्होंने कभी क़ानून का पालन नहीं किया, कभी नियमों के मुताबिक़ धंधा नहीं किया वे अपने सेकुलर बुद्धिजीवी मित्रों के गिरोह की मदद से देश की जनता को बता रहे हैं कि इससे “रोजगार” खत्म होने का खतरा है और “राजस्व” का नुक्सान भी है.

उत्तरप्रदेश में “एंटी-रोमियो स्क्वाड” के गठन पर सेकुलर ताकतों का रुदालीगान अपेक्षित ही था. जबकि एंटी-रोमियो स्क्वाड का गठन और आईडी प्रूफ अनिवार्य इसलिए किया गया है, ताकि अपना नाम बदलकर यानी हिन्दू नाम रखकर लड़कियों के साथ धोखाधड़ी, निकाह करने वाले मुस्लिमों को पकड़ा जा सके.

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 1 मई 2016 को शुरू की गई “उज्ज्वला योजना” ने उत्तरप्रदेश में भाजपा के लिए वोटों की बड़ी फसल तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी.

मांसाहार पर बहस जारी है। वैध और अवैध बूचड़खानों पर भी बहस जारी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार के आने के बाद से यह बहस और तेज भले ही हो गई हो, परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि अधिक समय नहीं हुआ है, जब देश में कुछ लोग “गौमांस उत्सव” भी मना रहे थे।

आखिर जिस बात का केजरीवाल को इंतज़ार था वह घड़ी आ ही गई. MCD चुनाव सिर पर हैं और ऐसे में यदि “अराजकता-प्रेमी” केजरीवाल को छाती कूटने का मौका मिल जाए तो उसके लिए इससे बढ़िया क्या बात होगी.

विश्लेषक हैरान हैं कि आखिर पिछले दो वर्षों में ऐसा क्या हुआ है कि भाजपा उत्तर-पूर्वी राज्यों में भी अपना आधार बनाने में सफल हो रही है. असम एक शुरुआत थी, लेकिन देखते ही देखते अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में भी भाजपा ने पैर पसार लिए हैं. आखिर भाजपा के हाथ में ऐसा कौन सा जादू लग गया है?

हिन्दू संतों के किसी भी मामले में हमारा कथित रूप से नेशनल लेकिन वास्तव में “नोएडा-गुडगाँव छाप” मीडिया बहुत उतावला रहता है, चाहे मामला आसाराम बापू का हो या फिर असीमानंद का.

पिछले दिनों शिवसेना के सांसद प्रोफ़ेसर रवीन्द्र गायकवाड़ द्वारा एयर इण्डिया में स्टाफ के साथ बदसलूकी और पिटाई का मामला सुर्ख़ियों में रहा. जैसा कि अक्सर होता है, हम मीडिया में लीक वीडियो क्लिप तथा मीडियाई हंगामे को सच मानकर उसी के अनुसार बर्ताव करते हैं, परन्तु हमेशा मीडिया सच ही हो यह जरूरी नहीं है.

मुसलमानों में रमजान और हिंदुओं में पुरुषोत्तम मास के दिन पवित्र माने जाते हैं| मुझे रमजान के महीने की एक घटना याद गयी| 1989 या 1990 की बात है, मेरे एक परिचित थे - मिर्ज़ा अब्दुल हमीद बेग, “पंच-नमाज़ी”, मुझ से उम्र में करीब 20 बरस बड़े, मुल्ला जी के नाम से जाने जाते थे|

भारत के प्रधानमंत्री मोदी जी की तरफ से अजमेर की दरगाह शरीफ पर चादर चढ़ाने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नक़वी को अजमेर भेजा गया. देश के संवैधानिक प्रमुख होने के नाते सभी धर्मों-पंथों के प्रति उदारता दिखाना उनका कर्त्तव्य है, लेकिन जब एक सामान्य हिन्दू इस तरह की हरकत करता है तो उसकी सनातनी शिक्षाओं के प्रति संदेह उत्पन्न होता है.

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