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72 वर्षीय बुज़ुर्ग मेहता जी इस बात को लेकर भौंचक और दुखी थे कि उनके द्वारा जीवन भर मेहनत करके कमाई गयी पूँजी अर्थात फिक्स्ड डिपोजिट (सावधि जमा) पर बैंकों ने ब्याज दर और घटा दी है.

कुछ दिनों पहले तमिलनाडु में (जहाँ कि ब्राह्मण विद्वेष अपने चरम पर है), पेरियार के चेलों ने एक नया तमाशा रचा था। वैसे तो पहले भी इन “विकृत मानसिकता वाले” लोगों ने सेलम, तमिलनाडु में ही भगवान राम की प्रतिमा को जूते की माला पहनाकर उनका जुलुस निकाला था।

गणेशोत्सव जैसा ऊर्जावान और रंगीला त्यौहार बस कुछ ही दिनों दूर है. हम लोगों ने बचपन से अपनी पाठ्यपुस्तकों में पढ़ा है कि अमर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अर्थात बाल गंगाधर लोकमान्य तिलक जी ने अंग्रजों से मुकाबला करने हेतु देश की जनता को एकत्रित करने के उद्देश्य से गणेशोत्सव को “सार्वजनिक” बनाने की पहल की और सबसे पहले 1893 में पुणे में तिलक ने दस दिवसीय गणेशोत्सव मनाने की शुरुआत की.

इस समय भारत की शासकीय एयरलाईन्स अर्थात एयर इण्डिया के विनिवेश की प्रक्रिया जारी है. जैसा कि अब सभी लोग जान गए हैं, पिछले साठ वर्षों में राजनैतिक दलों ने एयर इण्डिया को “दूध दुहने वाली गाय” की तरह इस्तेमाल किया है.

हाल ही में एक मामला मीडिया में काफी चर्चा में रहा है, वह है चंडीगढ़ के दो हाई-प्रोफाईल परिवारों के बीच का मामला. मीडिया रिपोर्ट्स, पुलिस के बयानों और चंद स्वनामधन्य विश्लेषकों के मुताबिक़ इसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के बेटे ने एक आईएएस अधिकारी की बेटी का पीछा किया, धमकाया, छेड़छाड़ की.

(मूल अंगरेजी लेख के अनुवादक और संकलक :- सुरेश चिपलूनकर)

महाराजा रणजीत सिंह की वंशावली खत्म करने की रानी विक्टोरिया की योजना का खुलासा हुआ है. जैसा कि सभी जानते हैं, पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह का साम्राज्य एक खुशहाल एवं समृद्ध राज्य था.

मराठी में मूल लेखक : संकेत कुलकर्णी 

हिन्दी अनुवाद एवं संकलन : सुरेश चिपलूनकर

भारत की सेना सदैव गर्व करने लायक काम करती रही है. इस सेना ने कई युद्धों में तथा बहुत सी बार शांतिकाल में भी अपनी वीरता और दिलेरी के नए आयाम गढ़े हैं.

जब कोई सेना बुरी तरह हारने लगती है और उसे दुम दबाकर पीछे की तरफ भागना होता है, तब अक्सर वह हारी हुई सेना वापस जाते-जाते अपनी खीझ और क्रोध उतारने के लिए लूटपाट, हत्याएँ करती हुई... गाँव उजाडती हुई भागती है.

जब हम थियेटर में मधुर भंडारकर की फिल्म देखने जाते हैं तो हमारे दिमाग में मधुर भंडारकर की ही छवि होती है. “चांदनी बार”, “ट्रेफिक सिग्नल”, “कारपोरेट” जैसी कई शानदार फ़िल्में देने वाले तथा अपनी फिल्मों में किसी हीरो-हीरोइन को हावी न होने देते हुए इस फिल्म माध्यम को “निर्देशक का माध्यम” सिद्ध करने वाले मधुर भंडारकर की हालिया फिल्म “इंदु सरकार” हाल ही में देखने को मिली.

सामान्यतः आज देश के विभिन्न भागों में बंग्लादेशी व पाक-परस्त ज़िहादी अनेक प्रकार से इस्लामिक आतंकवाद में लिप्त है, जिससे बढती हुई राष्ट्रिय व सामाजिक समस्याओं का किसी को अनुमान ही नहीं हो रहा है। क्योंकि भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सत्य सनातन संस्कृति और दर्शन को आज के छदम सेक्युलर केवल मैकाले व मार्क्सवाद की दृष्टि से देखने के आदी हो चुके है।

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