पैगंबरवासी क्रान्तिकारी हुतात्मा शायर अशफ़ाक़ उल्ला ख़ाँ का जन्म उत्तर प्रदेश के शहीदगढ शाहजहाँपुर में रेलवे स्टेशन के पास स्थित कदनखैल जलालनगर मुहल्ले में 22 अक्टूबर 1900 को हुआ था।

भारत में सबसे पहले हवाई जहाज़ उड़ाने वाला पायलट (First Indian Pilot) कौन था, इस बारे में सवाल पूछने पर सामान्यतः JRD Tata का नाम सामने आता है. लेकिन क्या यह सच है??

भारत के इतिहास में कई प्रकार के काले पन्ने भी दर्ज हैं. इन्हीं काले पन्नों में से एक है, बाकायदा सरकारी आदेश पर संसद भवन के सामने दिनदहाड़े, सरेआम सैकड़ों लोगों की हत्या. और ये लोग कौन थे? कोई आतंकी संगठन वाले, या उत्पाती, अथवा सरकारी संपत्ति लूटपाट या नाश करने वाले?? नहीं!!!

सनातन धर्म को लेकर इससे ईर्ष्या-द्वेष करने वाले विधर्मी कई बातों को लेकर सामान्य लोगों में भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास सतत करते रहते हैं. जैसे कि यह झूठ फैलाया जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में गौमांस खाया जाता था, अथवा वैदिक काल में सनातन धर्मी ऋषि-मुनियों ने सारा ज्ञान अपने पास छिपाकर रखा, गरीबों-वंचितों को नहीं दिया इत्यादि.

कभी भारतीय संस्कृति का प्रतीक माने जाने वाले बंगाल की दशा आज क्या हो चुकी है, ये बात तो किसी से छिपी नहीं है. हिन्दुओं के खिलाफ साम्प्रदायिक दंगे तो पिछले काफी वक़्त से होना शुरू हो चुके हैं और अब तो हालात ये हो चुके हैं कि त्यौहार मनाने तक पर रोक लगाई जानी शुरू हो गयी है.

कर्णाटक से केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े (Anant Hegde) द्वारा टीपू सुल्तान (Tipu Sultan) को अत्याचारी और बर्बर शासक बताया गया। इतिहास को निष्पक्ष होकर देखे तो पता चलता है कि टीपू सुल्तान का असली चेहरा क्या था।

दीपावली के दिन मैंने एक फेसबुक पोस्ट की थी, जिसमें मैंने उस त्यौहार के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे, विभिन्न चौराहों पर खड़े पुलिसकर्मियों को दीपावली की बधाई प्रेषित की थी.

प्राचीन भारत में ऋषि-मुनियों को जैसा अदभुत ज्ञान था, उसके बारे में जब हम जानते हैं, पढ़ते हैं तो अचंभित रह जाते हैं. रसायन और रंग विज्ञान ने भले ही आजकल इतनी उन्नति कर ली हो, परन्तु आज से 2000 वर्ष पहले भूर्ज-पत्रों पर लिखे गए "अग्र-भागवत" का यह रहस्य आज भी अनसुलझा ही है.

संजय लीला भंसाली की फ़िल्म पदमावती के कारण आज अल्लाउद्दीन खिलजी पुनः चर्चित हो चुका है, जो मध्यकाल के दुर्दांत शासकों में से एक था.

माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रकाश के त्योहार दिवाली पर आतिशबाजी पर रोक लगाने के साथ ही देश में आतिशबाजी की परम्परा तथा चलन पर एक बहस छिड़ गई है. पटाखों (आतिशबाजी) के चलन को नकारने वाले मुख्य रूप से दो तर्क दे रहें हैं -

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