पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तानाशाही बढती ही जा रही है। हाल के वर्षों में ममता बनर्जी ने अपनी तानाशाही में मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर हिन्दुओं के खिलाफ कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिससे लगता है कि वे पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश बनाने पर तुली हुई हैं।

सभी भारतीयों के दिल में भारत की सेना के प्रति आदर एवं स्वाभिमान की मजबूत भावना सदैव रही है, जो कि स्वाभाविक ही है. सीमा पर निरंतर दक्षता और सावधानी के साथ देश की सुरक्षा करना एवं इस दौरान अपने प्राणों का बलिदान देने जैसे महान कार्य हमारी सेना ने पिछले कई वर्षों में किए हैं.

चीन का युद्धोन्माद यदा-कदा दुनिया के सामने आता ही रहता हैै, कभी अपनी अराजक सैन्य शक्ति के प्रदर्शन के तौर पर चीन दुनिया को डराता है तो कभी युद्ध की धमकी देकर दुनिया को भयभीत है। पडोसी देश जैसे वियतनाम, ताईवान, भूटान, भारत तो चीन की अराजक हिसक सामरिक शक्ति के सामने डरे हुए रहते हैं, भयभीत रहते हैं और अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए चिंतित भी रहते है।

परिवार भारत का वैशिष्ट्य माना जाता है। यह इसलिए कि परिवार के भाव का जो विस्तार भारतभूमि में हुआ, वह अन्यत्र कहीं और नहीं हुआ, बल्कि हुआ यह कि जो परिवार भारत में एक भाव था और जिसका विस्तार अपने कुटुम्ब से बढ़ कर संपूर्ण पृथ्वी तक हुआ था, उस परिवार भाव को अन्यत्र विशेषकर यूरोप में एक संस्था माना और बना दिया गया और इस प्रकार वह एक व्यक्तिगत सत्ता का प्रतीक बनकर रह गया।

भाजपा सरकार द्वारा कुलदीप नैयर को ‘उत्कृष्ट कोटि की विशिष्ट सेवा’ के लिए पद्म-विभूषण से सम्मानित किया गया है. यह कोई आकस्मिक या अनायास नहीं. पिछले जून माह में भाजपा अध्यक्ष उनसे मिलने भी गए थे. तब फौरन नैयर ने एक लेख प्रकाशित करके भाजपा शासन को ‘अशुभ’ बताते हुए फिर पहले की तरह केवल फटकारा और दुत्कारा.

जब से भारत में अंग्रेजों का आगमन हुआ तब से ही उन्होंने भारत की बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को वर्गों में बांटकर वर्ग निर्माण के प्रयत्न शुरु कर दिये थे। आवश्यक था कि इसके लिए परिवारों की आपसी एकता को छिन्न-भिन्न किया जाता। यही सोचकर अंग्रेजों ने भारत में महिला और पुरुष के नाम पर अलग अलग अधिकारों की कूटनीतिक संरचना शुरु कर दी।

फेसबुक आपके डाटा का क्या करता है? आपके मन में भी यह सवाल कई बार उठता होगा। दरअसल, डिजिटल युग में हमारी सांसे ऑक्सीजन से नहीं बल्कि डाटा से चलती हैं। फेसबुक हमें कभी नहीं बताता कि आखिर वो हमारे डाटा का क्या करता है? हमारा डाटा कहां जाता है और इसका इस्तेमाल कैसे होता है? हम सोशल मीडिया पर अपनी फोटो, डिटेल और सूचना शेयर तो करते हैं, लेकिन बाद में इन चीजों का क्या होता है, हमें नहीं पता।

ऑस्ट्रेलिया में 11वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्रा एबोनी द्वारा भेजे गये हिंदू धर्म के जन्म संस्कार संबंधित कुछ प्रश्न हिंदू काउन्सिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने मुझे जवाब देने के लिये भेजे थे| कॅथॉलिक शिक्षा संस्था की इस छात्रा को धर्म-अध्ययन संबंधित निबंध लेखन के लिये एथनोग्राफिक अनुसंधान के जरिए किसी हिंदू धर्मावलंबी से संपर्क करना जरूरी था | उनके अध्ययन का विषय “हिंदू धर्म में जन्म संस्कार और तीर्थयात्रा” था | एबोनी से पूछे गये प्रश्न और मेरे उत्तर में अन्य पाठकों की भी रुचि हो सकती है इसलिये यह लेख लेख रहा हूँ |

धरती पर कुछ ऐसे व्यक्तित्व होते हैं जो असाधारण, दिव्य और विलक्षण होते हंै। हर कोई उनसे प्रभावित होता है। ऐसे व्यक्तित्व अपने जीवन में प्रायः स्वस्थ, संतुष्ट और प्रसन्न रहते हैं। उनमें चुनौतियों को झेलने का माद्दा होता है। वे कठिन परिस्थितियों में भी अविचलित और संतुलित रहते हैं। बीजी रहते हुए भी उनकी लाइफ ईजी होती है। वे स्वयं में ही खोये हुए नहीं रहते, बल्कि दूसरों में भी अभिरुचि लेते हैं।

हम लोग आए दिन फेसबुक पर नए-नए किस्म के चैलेन्ज और मूर्खतापूर्ण एप्प्स के बारे में देखते-सुनते-पढ़ते रहते हैं.... "आप किस नेता की तरह दिखाई देते हैं?", "आप पिछले जन्म में क्या थे?", जैसे तमाम टाईमपास दिखाई देने वाले एप्लीकेशंस पर हजारों-लाखों लोग अपना डाटा, नाम, ईमेल आईडी वगैरा प्रसाद की तरह बाँटते रहते हैं... जबकि ये सारे एप्लीकेशंस केवल डाटा एकत्रित करने और आपकी सूचनाओं का उपयोग करने के टूल भर होते हैं... कुछ दिनों से एक नया ट्रेंड चला है 10 Years Challenge... जान लीजिए इसके खतरे...

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