जाकिर नाईक और कांग्रेस के मधुर सम्बन्ध आधिकारिक

Written by मंगलवार, 02 मई 2017 10:36

भारत की सेकुलर उर्वर भूमि पर गाहे-बगाहे कई कुख्यात हस्तियों ने जन्म लिया है और अपने वचनों-कर्मों से “हिन्दुस्थान” को चोट पहुँचाने का पूरा प्रयास किया है. पिछले साठ-पैंसठ वर्षों में इन कुख्यात हस्तियों को कांग्रेस का खुला वरदहस्त प्राप्त रहा है, क्योंकि इनमें से अधिकाँश मुस्लिम वोट बैंक से जुड़े रहे हैं.

ऐसी ही एक कुख्यात हस्ती हैं इस्लामी पंथ-प्रचारक और कुतर्कवादी मुल्ला अर्थात ज़ाकिर नाईक. इसके बारे में सभी जानते हैं, और यदि आज भी नहीं जानते हों तो गूगल कर लें और इसके दो-चार “भाषण”(??) सुन लें तो समझ जाएँगे कि मधुर वाणी में लिपटा हुआ ज़हर कैसे फैलाया जाता है. जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, उसने जाकिर नाईक के चारों तरफ फंदा कसना शुरू कर दिया था. सबसे पहले जिस “नकली NGO” के बैनर तले जाकिर नाईक अपने सारे कारनामे किया करता था, उस NGO की गले के नस दबाई गई. “NGOs के गले की नस” होती है विदेशी चन्दा. FCRA क़ानून के तहत जब गहराई से जांच की गई तो पता चला कि जाकिर नाईक को सऊदी अरब, सूडान, यमन और कतर जैसे इस्लामी देशों से बड़ी मात्रा में चंदा मिलता है, जिसका कोई हिसाब-किताब उसने सरकार को नहीं दिया था. पोल खुलते ही ज़ाकिर नाईक विदेश भाग निकला, और आज भी वहीं है. इसके बाद जाकिर नाईक के पीछे CBI का फंदा फेंका गया, तब और भी कई राज़ खुले... इन तमाम रहस्यों में से एक “खुला रहस्य” यह भी था कि ज़ाकिर नाईक के कांग्रेस और खासकर सोनिया-राहुल गांधी से काफी मधुर सम्बन्ध रहे हैं. अभी तक तो यह बात बिना किसी सबूत के कही जाती थी, लेकिन अब सीबीआई की जांच में जो दस्तावेज निकलकर आ रहे हैं, उससे सिद्ध होने लगा है कि जाकिर नाईक और कांग्रेस के सम्बन्ध “इस हाथ दे, उस हाथ ले” वाले रहे.

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जांच में पता चला है कि जाकिर नाईक के NGO ने कांग्रेस को पचास लाख रूपए का चंदा दिया... “पचास लाख”!!! जी हाँ... इतना भारी-भरकम चन्दा एक NGO किसी राजनैतिक पार्टी को क्यों देता है? ताकि उसका ख़ास ख़याल रखा जाए... और यह चन्दा कई बार कांग्रेस के विभिन्न संगठनों को दिया गया, जिसमें राजीव गांधी चैरिटेबल फाउंडेशन भी शामिल है. RGCT की अध्यक्षा हैं सोनिया गाँधी और प्रमुख डायरेक्टर हैं राहुल और प्रियंका गांधी. कांग्रेस ने भी चन्दे हासिल करने के लिए तमाम सोसाइटी और NGO खड़े कर रखे हैं, उन्हीं में से एक है “कमला नेहरू मेमोरियल हॉस्पिटल ट्रस्ट”. इस ट्रस्ट को भी जाकिर नाईक ने पच्चीस लाख रूपए का चंदा दिया. मजे की बात यह है की कांग्रेस के इन अधिकाँश ट्रस्टों, सोसायटी, संस्थानों की अध्यक्षा सोनिया गांधी हैं और कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा. इस चन्दे के बदले में जाकिर नाईक के NGO की इतनी ऊंची औकात हो गई थी कि, वह केन्द्रीय मंत्रियों को पत्र लिखकर किसी के भी खिलाफ कार्यवाही करने की सलाह देता रहता था.

सीबीआई की जांच में पोल खुलने के बाद कांग्रेस का “फूहड़ और बचकाना बयान” आया है कि हमने तो जाकिर नाईक से उस समय पैसा लिया था, जब उसके खिलाफ कोई मामला नहीं था, और ना ही जाकिर नाईक कोई भड़काऊ भाषण देता था. जब कांग्रेस के इस बयान की अच्छी-खासी मरम्मत सोशल मीडिया पर हो गई, तो बचाव में अगला बयान और भी फूहड़ आया कि हमने तो जाकिर नाईक से मिले चन्दे को वापस कर दिया था. जब जाकिर नाईक के NGO इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन से संपर्क किया गया तो उन्होंने लिखित में दे दिया की उन्हें कांग्रेस की तरफ से कोई भी धनराशि वापस नहीं मिली है.

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संक्षेप में कुल मिलाकर बात यह है कि जैसे-जैसे मोदी सरकार देशद्रोहियों और विदेशी चंदे पर पलने वाले NGOs की गर्दन पर अपना शिकंजा कसती जा रही है, वैसे-वैसे कांग्रेस के साथ कई अवांछित तत्वों के रिश्ते भी सामने आने लगे हैं और “नकली किस्म के प्रगतिशील बुद्धिजीवियों” में असहिष्णुता भी बढ़ने लगी है. इसीलिए आए दिन मोदी सरकार के खिलाफ नए-नए घटिया हथकण्डे अपनाए जाने लगे हैं और देश की सबसे मजबूत रीढ़ अर्थात सेना और किसानों को लेकर घटिया किस्म की राजनीति और “कथित खुलासे” होने लगे हैं. जब विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ अभी तक भ्रष्टाचार का एक भी मामला नहीं मिला तो ऊटपटांग मुद्दों पर हंगामा करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है... लेकिन जैसे-जैसे सीबीआई जाँच आगे बढ़ेगी, NIA के हाथों में सबूत लगेंगे, आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो द्वारा पुराने मामले खोले जाएँगे, वैसे-वैसे कांग्रेस और भी बेनकाब होती चली जाएगी. असम-केरल-बंगाल में भी वामपंथियों के ऐसे ही मधुर रिश्ते देशद्रोहियों के साथ हैं, जो धीरे-धीरे सामने आएँगे... इंतज़ार करें.

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