मध्यप्रदेश में एक नया "व्यापमं", अब MPPSC भी?

Written by गुरुवार, 05 अक्टूबर 2017 19:19

मध्यप्रदेश के नाम एक अभूतपूर्व घोटाला है, जिसका नाम है “व्यापमं घोटाला”. अब तक इसके बारे में लगभग सभी लोग जान चुके हैं, अब तो यह इंटरनेशनल स्तर तक भी पहुँच चुका है.

आज तक कोई नहीं जानता, कि वास्तव में राज्य सरकार की नौकरियों में भर्ती का यह घोटाला कब से चल रहा था. एक तरफ CBI तो इसका ओर-छोर पता लगाने में जुटी है, तो दूसरी तरफ मध्यप्रदेश के “उर्वर दिमाग” वाले लोग नित नए घोटाले करने से बाज नहीं आ रहे हैं. व्यापमं के बाद पुलिस भर्ती का घोटाला सामने आया था... लेकिन एक ताज़ातरीन मामला सामने आया है मप्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा का.

इस परीक्षा के परिणामों के अनुसार बहुत ही अजूबे तरीके से “जैन समुदाय” के ही अधिकाँश बच्चों ने बड़ी संख्या में MPPSC को क्रैक कर लिया. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के रिजल्ट घोषित होने के साथ ही इस पर विवाद शुरू हो गया था, जो अब बढ़ता ही जा रहा है. जैन समुदाय के कई छात्रों के एक साथ चुने जाने को केवल संयोग नहीं, बल्कि साफ़-साफ़ घोटाला बताते हुए राज्य में धरने प्रदर्शन शुरू हो चुके हैं. असल में पूरा का पूरा मामला है भी संदिग्ध ही, इतने सारे “संयोग” होना नितांत असंभव है. ज़ाहिर है कि “खेल” बड़े पैमाने पर और बड़े ऊँचे लेवल पर खेला गया है.

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MPPSC के लिए मध्यप्रदेश के हर शहर में परीक्षा केन्द्र होता है, बल्कि एक ही जिले में कई-कई केन्द्र भी होते हैं. सामान्यतः कोई भी छात्र परीक्षा देने के लिए अपने गृहनगर का ही चुनाव करता है. लेकिन इंदौर की एक “कोचिंग एकेडमी” है, जिसका नाम है “फास्ट आईएएस एकेडमी” इसके सागर स्थित छात्रों ने अपनी परीक्षा देने के लिए केन्द्र कौन सा चुना “आगर-मालवा” नामक एक छोटा क़स्बा... सागर से आगर-मालवा 350 किमी की दूरी पर है. जबकि MPPSC के सागर में सात परीक्षा केन्द्र हैं, दमोह में तीन केन्द्र हैं, फिर भी “संयोग देखिये” कि ये 21 “जैन नौजवानों” को परीक्षा देने के लिए आगर-मालवा ही पसंद आया. ये लोग आगर-मालवा केन्द्र चुनते हैं, फिर “एक और संयोग” देखिये कि परीक्षा नियंत्रक महोदय इन सभी को एक साथ नेहरू पीजी कॉलेज का केन्द्र देते हैं.

 

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“संयोग से” इस केन्द्र की समन्वयक भी “जैन” ही होती हैं, और फिर अचानक ये 21 जैन एक साथ मप्र लोकसेवा आयोग की परीक्षा में सफल हो जाते हैं. “संयोग से” यह कोचिंग इंस्टीट्यूट दिगंबर जैन महासमिति के तत्वावधान में चलता है और स्वाभाविक रूप से इसके कर्ताधर्ता भी जैन ही हैं. यह भी नितांत “संयोग” ही है कि इस वर्ष मध्यप्रदेश में MPPSC के सफल छात्रों में से हर चौथा छात्र इसी महान इंस्टीट्यूट से निकला है. एक दिन पहले तक दिगंबर जैन महासमिति की ये “फास्ट आईएएस एकेडमी” की कोचिंग अपने परीक्षार्थियों की सफलता पर बधाई दे रही थी. अब जैसे ही घोटाला सामने आ गया है, तो इनकी वेबसाइट “अंडर मेंटीनेंस” चली गई है... ये भी एक “संयोग” ही होगा.

Noname

कहने का तात्पर्य यह है कि अगर आपके पास भरपूर पैसा है, तो आप मध्यप्रदेश चले आईये, यहाँ आपको राज्य सरकार की नौकरी मिल सकती है... बस जुगाड़ होनी चाहिए. मध्यप्रदेश बहुत उर्वर भूमि है. 

Read 708 times Last modified on शुक्रवार, 06 अक्टूबर 2017 21:25
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