उत्तर-पूर्व आतंकियों को चर्च से पैसा :- वामपंथी नेता माने

Written by शनिवार, 24 फरवरी 2018 21:59

जो बात पिछले कई वर्षों से भाजपा कह रही है, उस पर वामपंथ के ही एक नेता ने अपनी मुहर लगा दी है. जैसा कि सभी जानते हैं, उत्तर-पूर्व के राज्यों में नागालैंड और मेघालय लगभग पूर्णरूप से ईसाई राज्य बन चुके हैं, नागालैंड में तो बाकायदा कई स्थानों पर “लैंड ऑफ़ क्राईस्ट” (Church Funding in Nagaland) के बोर्ड लगे दिख जाएंगे.

यही स्थिति त्रिपुरा की भी है, जबकि वहाँ कई वर्षों से वामपंथी शासन रहा है. हाल ही में एक पूर्व वामपंथी नेता और भूतपूर्व सांसद खगेन दास ने इस बात का खुलासा किया है कि उत्तर-पूर्व के राज्यों में जो आतंक और ड्रग-हथियार स्मगलिंग का कारोबार है उसमें चर्च की प्रमुख भूमिका है. खगेन दास (Khagen Das) ने अपने लिखित वक्तव्य में कहा है कि पिछले कई वर्षों से और कई सरकारों में उत्तर-पूर्व के राज्य उपेक्षित से रहे हैं, इसलिए यहाँ अलगाववादी घटनाएँ (Terrorism in North East India) बढ़ गयी हैं, जिन्हें पैसा और साधन देकर चर्च अपनी रोटियाँ सेंक रहा है.

खगेन दास त्रिपुरा में नई बनी एक राजनैतिक पार्टी, “इंडीजीनस पीपल्स फ्रंट ऑफ़ त्रिपुरा” (IPFT) के बारे में बोल रहे थे. हाल ही में यह पार्टी त्रिपुरा में काफी चर्चा में रही, क्योंकि इस पार्टी के घोषणापत्र में साफ़ लिखा है कि वे त्रिपुरा के दो टुकड़े करके एक अलग राज्य का निर्माण करना चाहते हैं. खगेन दास आगे कहते हैं कि 1980 के दंगों तथा पिछले तीस वर्षों की आतंकी गतिविधियों के रिकॉर्ड को देखें तो इसमें चर्च का हाथ साफ़-साफ दिखाई देता है. चर्च ने इन जातीय-नस्लीय दंगों तथा उत्तर-पूर्व के विभिन्न ईसाई आतंकी संगठनों को पैसा मुहैया करवाया है, जिसके सबूत स्थानीय पुलिस के पास मौजूद हैं.

खगेन दास ने कुख्यात किम डेवी मामले का उल्लेख करते हुए लिखा है कि पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में हवाई जहाज से हथियार गिराने के प्रमुख दोषी किम को खुले तौर पर चर्च की मदद हासिल थी. किम डेवी के बचाव और उसे कानूनी दांवपेंचों के जरिये भारत से दूर बनाए रखने में चर्च ने प्रमुख भूमिका अदा की थी. किम डेवी और पीटर ब्लीच ने 1995 में पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में हथियार गिराए थे, और कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में दोनों ने स्वीकार किया है कि वे हथियार त्रिपुरा भेजे जाने वाले थे, परन्तु बंगाल की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने भी इस मामले में कोई ख़ास दिलचस्पी नहीं दिखाई, जबकि त्रिपुरा में भी उन्हीं की सरकार थी. क्योंकि यदि वामपंथी पार्टियाँ खुलेआम यह मान लेतीं कि किम डेवी के पीछे चर्च की शक्तियाँ हैं, तो इससे भाजपा के आरोप को बल मिलता और उधर केरल में वामपंथियों की मुश्किल बढ़ जाती, जहाँ वे चर्च और जमाते-इस्लामी के बीच संतुलन साधते रहे हैं. हालाँकि अपने अंतिम समय में खगेन दास ने अपनी मूल विचारधारा (यानी वामपंथ) के अनुसार त्रिपुरा की जनता को इस बात के लिए बधाई दी, कि उसने इन आतंकी गतिविधियों और देश तोड़ने वाली ताकतों का मुंहतोड़ जवाब देते हुए लगातार वामपंथी पार्टियों को जिताया और भाजपा को यहाँ सर उठाने का मौका नहीं दिया.

उनका कहना है कि सीमावर्ती राज्य होने के कारण यहाँ की सुरक्षा और आतंक को रोकने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है, उनकी माँग थी कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द चर्च की गतिविधियों पर अंकुश लगाए, ताकि उत्तर-पूर्वी राज्यों में स्थिरता और शान्ति आए. हाल ही में 21 जनवरी 2018 को खगेन दास की मृत्यु हुई, लेकिन संसार से जाने के पहले वे वामपंथ के दोगले व्यवहार को उजागर कर ही गए. 

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1) अमृता फडनवीस, सांता क्लौज़ और नेशनल प्रेयर... :- http://www.desicnn.com/news/amrita-fadnavis-is-under-fire-regarding-santa-claus-promotion-and-usa-national-prayer-breakfast 

२) ईसाई धर्मान्तरण की संस्थाओं पर ताले लगना शुरू हुए.. :- http://www.desicnn.com/samachar/compassion-international-and-fcra 

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