मोदी जी की छोड़ी हुई “बिल्ली”, और चूहों का झुण्ड

Written by गुरुवार, 13 अप्रैल 2017 08:38

अभी तक आपने फर्जी समाचारों में यह पढ़ा होगा कि, फलाँ समूह ने अपनी माँगें नहीं मानने के कारण इस्लाम अपनाने की धमकी दी... लेकिन अब चक्र उल्टा घूमने की तैयारी में है...

अलीगढ़ के जमालपुर इलाके में मंगलवार की रात को जमकर हंगामा हुआ. इसका कारण यह था कि तीस वर्षीय रेहाना और उसकी छोटी बच्ची की मदद के लिए कुछ हिन्दू संगठन आगे आए और विवाद बढ़ने लगा. विवाद की वजह थी रेहाना के साथ उसके ससुराल वालों का अन्याय, और उसके शौहर द्वारा “तीन तलाक” की धमकी. 

आगरा पुलिस के अनुसार बुलंदशहर की रहने वाली रेहाना का निकाह मोहम्मद शरीफ से 2012 में हुआ था. कुछ विवादों के कारण रेहाना अपने बच्चे को लेकर मायके चली गई. शौहर-बीवी के बीच सुलह की कई कोशिशें हुईं लेकिन नाकाम रहीं. मंगलवार को रेहाना अपने माता-पिता के साथ मोहम्मद शरीफ के घर पहुँची ताकि कोई समझौता किया जा सके, लेकिन मोहम्मद शरीफ ने इन्हें घर में ही नहीं घुसने दिया. रेहाना अपनी बच्ची के साथ वहीं सड़क पर बैठ गई और न्याय की गुहार लगाने लगी. हिन्दू महासभा के कुछ युवा वहां पहुँचे और रेहाना की मदद का रास्ता खोजने लगे, स्वाभाविक है कि तनाव बढ़ गया, इसलिए पुलिस भी पहुँच गई.

कई घंटे चले घटनाक्रम के बाद रेहाना को पुलिस ने समझाबुझा कर मायके भेज दिया, लेकिन मोहम्मद शरीफ जो कि रेहाना को “तीन तलाक” देने की धमकी दे रहा था, वह इसलिए पीछे हट गया क्योंकि रेहाना ने भी भीड़ के सामने मोहम्मद शरीफ को धमकी दे दी, कि यदि उसने उसे तीन-तलाक दिया तो वह अपनी बच्ची के साथ हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी, फिर चाहे इसका अंजाम जो भी हो. यानी अब बात यहाँ तक आन पहुँची है कि तीन तलाक के विरोध में मुस्लिम महिलाएं हिन्दू धर्म अपनाने की धमकी भी देने लगी हैं...

संक्षेप में तात्पर्य यह है कि जब से मोदीजी ने “तीन तलाक” के मुद्दे पर हैरान-परेशान-त्रस्त और दुखी मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में आवाज़ उठाई है और इस शरीया क़ानून को रद्द करने के कदम उठाए हैं, उसके बाद हजारों मुस्लिम महिलाओं की हिम्मत बढ़ी है. तीन तलाक के मुद्दे पर चैनलों में होने वाली बहस से मौलवी और मौलाना लगातार बेनकाब हो रहे हैं और इन चैनलों पर मुस्लिम महिलाएं खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं. उत्तरप्रदेश के चुनावों में भी इस मुद्दे ने वोटिंग पर काफी असर दिखाया था. मुस्लिम महिलाएं तो धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही हैं, लेकिन हमारे देश के “मानसिक कंगाल सेकुलर और प्रगतिशील बुद्धिजीवी” अभी भी या तो दुविधा में हैं, या फिर बुर्के में अपना मुँह छिपाने की कवायद में हैं. उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि “प्रगतिशीलता” का ढोल पीट-पीट कर जब तमाम हिन्दू कानूनों और हिन्दू कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाई थी, उस समय मोदीजी का यह ट्रंप कार्ड उनके दिमाग से बाहर था. आज तीन तलाक पर सभी वामपंथी बुद्धिपिशाचों की बोलती बंद है... समय तेजी से उनके हाथों से निकलता जा रहा है और वे “घुग्घू” की तरह इधर-उधर देख रहे हैं. हिन्दुओं के क़ानून बनाते समय या बदलते समय किसी से नहीं पूछा जाता, लेकिन मुस्लिम महिलाओं को पीड़ा से निकालने के लिए जिस असंवैधानिक क़ानून को रद्द करने की मांग की जा रही है, उस पर भी “प्रगतिशीलों” की जुबान कटी पड़ी है... बौद्धिक गिरावट आखिर कितनी हो??

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