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प्राचीन भारत में हमारे ऋषि-मुनियों एवं विद्वानों ने जनता को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रखने के लिए परम्पराओं में कई ऐसे खेल आविष्कार कर दिए थे, जिनके द्वारा न सिर्फ हिन्दुओं का युद्ध कौशल उभरकर सामने आता था, बल्कि शस्त्रों को पहचानने, उनके द्वारा सटीक हमला करने एवं उनसे बचाव करने की तकनीक भी व्यक्ति खेल-खेल में ही सीख जाता था.

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