चित्र में आप जिस लडकी को देख रहे हैं, उसका नाम है जोआना पालानी. देखने में भले ही मासूम और सुन्दर दिख रही हो, लेकिन है बेहद खतरनाक.

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RSS के आनुषंगिक संगठन जनाधिकार समिति के तत्त्वावधान में आयोजित प्रदेशव्यापी धरने के दौरान उज्जैन में हुई सभा के दौरान संघ के तपे-तपाए स्वयंसेवक और सम्मानित दलित वर्ग से आने वाले उच्च शिक्षित डॉक्टर कुंदन चंद्रावत ने भावावेश में आकर एक गलत बयान दे दिया.

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ज़ाहिर है कि शीर्षक पढ़कर आप चौंक गए होंगे. स्वाभाविक सी बात है, क्योंकि आपके दिमाग में यह बैठा दिया गया है कि शिक्षा का अधिकार क़ानून यानी राईट टू एजूकेशन (RTE) एक गरीब समर्थक और समाज की भलाई के लिए बनाया क़ानून है.

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लोकतंत्र, जिसे जनतंत्र एवं प्रजातंत्र इत्यादि नामों से जाना जाता है, देश की जनता के लिए वरदान स्वरूप है, जिसकी व्यवस्था संविधान निर्माताओं द्वारा संविधान के माध्यम से राजशाही व तानाशाही इत्यादि को खत्म करने के लिए की गई।

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फ्रांस में राष्ट्रपति पद की दौड़ शुरू हो चुकी है और सोशलिस्ट फ्रांस्वा होलान्द के सामने पहली बार कड़ी चुनौती के रूप में नेशनल फ्रंट की उम्मीदवार मेरी ली पेन खडी हैं.

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अभी हाल ही में रामजस कॉलेज में AISA के बौद्धिक आतंकवादियों द्वारा देश में फिर से अराजकता उत्पन्न करने का कुत्सित प्रयास किया गया| एक सेमिनार थी जिसमे देश द्रोह के आरोपियों को बोलना था. विषय था "कल्चर ऑफ़ प्रोटेस्ट- अ सेमिनार एक्सप्लोरिंग रेप्रजेंटेशन ऑफ़ डिसेंट".

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जैसा कि हम सभी जानते हैं कि विशालकाय कारपोरेट हाउस अपनी मर्जी से सरकारें बनाते-बिगाड़ते हैं, बवाल खड़े करवाते हैं और अपना उल्लू सीधा करते रहते हैं. कैसे करते हैं यह आपको इस लेख में समझेगा.

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कुछ दिनों पहले इस वेबसाईट पर आपने मंदसौर-नीमच (मध्यप्रदेश) के ज्वेलर्स और बड़े व्यापारियों पर वहाँ के पठानों के खौफ के बारे में खबर पढ़ी थी, अब उसका एक नया और दुखद आयाम पढ़िए.

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सिंहल के राजा गंधर्व और रानी चम्पावती के घर एक सुंदर कन्या का जन्म हुआ जिसका नाम रखा गया पद्मिनी. राजकुमारी पद्मिनी नाम के अनुरूप ही कोमल, अत्यंत सुन्दर वर्ण और बुद्धि कौशल में परिपूर्ण कन्या थी.

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इंदिरा गांधी ने इस व्यक्ति को देशभक्ति और साहस का पर्याय बताया था, जबकि सी राजगोपालाचारी ने उन्हें शक्ति का प्रतीक। भारत में साम्यवाद के जनक रहे एम एन रॉय उन्हें अपनी प्रेरणा एवं निडर नेता के रूप में मानते थे, तो वहीं एक और साम्यवादी एमपी हिरेन मुखर्जी ने उनके निधन पर लोकसभा में शोकप्रस्ताव रखा.

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