“महात्मा”(??) गाँधी के मुस्लिम प्रेम के बारे में बाकायदा तथ्यात्मक रूप से एवं विभिन्न लेखकों की पुस्तकों के सन्दर्भ देकर पहले काफी कुछ लिखा जा चुका है. गाँधी द्वारा गाहे-बगाहे हिंदुओं को ज्ञान बाँटने के तमाम पहलू इतिहास में दर्ज हैं, साथ ही तुर्की के खलीफा के समर्थन में सुदूर भारत में चल रहे मुस्लिमों के आंदोलन, जिसका नाम हिंदुओं को मूर्ख बनाने के लिए “खिलाफत आंदोलन” रखा गया था, के प्रति गाँधी का समर्थन भी जगज़ाहिर है.

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हाल ही में ताजमहल को लेकर खामख्वाह एक विवाद पैदा किया गया कि योगी सरकार ने इसे उत्तरप्रदेश के दर्शनीय स्थलों की सूची से बाहर क्यों कर दिया. वास्तव में प्राचीन भारत की वास्तुकला को लेकर फर्जी इतिहासकारों ने भारतीयों के मनोमस्तिष्क में इतने नकारात्मक भाव भर दिए हैं कि उन्हें विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा बनाई गयी वास्तुकलाओं और लाशों पर बने मज़ार के ऐसे भवनों में अच्छाई दिखाई देती है, जिसके निर्माण के बाद कारीगरों के हाथ काट दिए गए हों.

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पिछले भाग में आपने हिन्दुओं के इतिहास एवं हिन्दू धर्म के बारे में कुछ मूल बातें पढीं... (पिछले भाग को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें..) अब आगे पढ़िए.

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हम हिन्दू किसे कहेंगे..? जो गीता जानता हो, रामायण – महाभारत जानता हो, वह..? तो फिर ऐसे अनेक हैं, जो ना तो गीता जानते हैं, और ना ही रामायण – महाभारत. फिर भी वह हिन्दू हैं..! फिर जो रोज भगवान् की पूजा करते हैं, वे हिन्दू हैं..? वैसे भी नहीं.

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मध्यप्रदेश के नाम एक अभूतपूर्व घोटाला है, जिसका नाम है “व्यापमं घोटाला”. अब तक इसके बारे में लगभग सभी लोग जान चुके हैं, अब तो यह इंटरनेशनल स्तर तक भी पहुँच चुका है.

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कलकत्ता में दुर्गा पूजा बड़ी ही धूम धाम से मनाया जाता है. यह त्यौहार इतना भव्य तरीके से मनाया जाता है कि भारत के विभिन्न प्रान्तों से बड़ी संख्या में लोग इसको देखने आते हैं.

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पश्चिमी विचारक मारिया विर्थ का यह लेख भारत के कई क्षेत्रों में पसंद और कई में नापसंद किया जाएगा, क्योंकि इसमें उन्होंने भारत की जाति-व्यवस्था को तोड़ने तथा ब्राह्मणों पर आए दिन होने वाले वैचारिक हमलों की पूरी पोल खोल दी है.

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कुछ दिनों पूर्व बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय काफी सुर्ख़ियों में रहा था. वहाँ की एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ की घटना ने इतना भीषण रूप लिया कि मामला आग की तरह फैला, मीडिया भी इसमें घुस आया, राजनीति भी इसमें खेली गयी और प्रशासन असहाय जैसा दिखाई दिया.

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बचपन से लेकर आज तक लगभग हम सभी ने अपनी-अपनी इतिहास की पुस्तकों में कई मुग़ल बादशाहों की “महानता”, “दयालुता” के चिकने-चुपड़े किस्से पढ़े हैं, सुने हैं. विभिन्न पुस्तकों में मोहम्मद जलालुद्दीन अकबर को “दीन-इ-इलाही” नामक पंथ का आविष्कारक भी बताया गया है, और हमारे दिमागों में ठूँस-ठूँस कर यह भरा गया है कि अकबर हो या औरंगज़ेब ये सभी मुग़ल बादशाह बहुत ही कोमल हृदय वाले और हिन्दुओं के साथ न्यायप्रिय व्यवहार करने वाले थे. परन्तु क्या वास्तव में ऐसा है??

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भारत के सबसे बड़े बैंक अर्थात भारतीय स्टेट बैंक जिसे सभी लोग SBI के नाम से जानते हैं, को अंततः सोशल मीडिया के दबाव में आकर झुकना ही पड़ा.

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