कुछ माह पहले रवीश कुमार ने एक “तथाकथित” बहस के दौरान यह पूछ लिया था कि “अगर देश में मुसलमानों की संख्या तेजी से बढ़ती भी रहे, तो इसमें दिक्कत क्या है...”. पश्चिम बंगाल में सत्रह जिले मुस्लिम बहुमत जनसँख्या वाले बन चुके हैं, और वहाँ की जमीनी स्थिति जितनी खतरनाक और जेहादी स्वरूप ले चुकी है... रवीश की बात का जवाब उसी में समाहित है.

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पश्चिम बंगाल के उत्तरी दिनाजपुर जिले के इस्लामपुर के नजदीक पिछले दिनों दारीभीत के एक स्कूल में शांतिपूर्ण छात्र आन्दोलन चल रहा था. आंदोलन की मुख्य माँग यह थी कि स्कूल में बांग्ला शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए. यह मांग भी लम्बे समय से चल रही थी, लेकिन 20 सितंबर गुरुवार के दिन यह आन्दोलन खूनी संघर्ष में बदल गया और ABVP छात्र संगठन के दो कार्यकर्ताओं राजेश सरकार व तापस बर्मन की पुलिस गोलीबारी से मौत हो गयी, जबकि विप्लव सरकार सहित अन्य कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए. इन सभी को सिलीगुड़ी के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया.

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पश्चिम बंगाल एक बेहद गंभीर मोड़ पर पहुँच चुका है, और यदि जल्दी ही कुछ न किया गया तो इसे “इस्लामिक बांग्लादेश” में बदलते देर नहीं लगेगी.

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