The Muslim women (Protection of Rights of Marriage) Bill 2017 लोकसभा में 2017 के जाते-जाते 29 दिसंबर 2017 को ध्वनिमत से पारित हो गया। यह बिल मुस्लिम समुदाय में व्याप्त ट्रिपल तलाक (Triple Talaq), जिसे तलाक-ए-बिद्दत के नाम से भी जाना जाता है, के खिलाफ है व मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिलाने वाला बिल है और ऐसा करने वाले व्यक्ति के लिए सजा का भी प्रावधान करता है।

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अभी तक आपने फर्जी समाचारों में यह पढ़ा होगा कि, फलाँ समूह ने अपनी माँगें नहीं मानने के कारण इस्लाम अपनाने की धमकी दी... लेकिन अब चक्र उल्टा घूमने की तैयारी में है...

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं की सैकड़ों याचिकाओं को देखते हुए जल्दी ही तीन तलाक, हलाला, शरीयत कोर्ट और बहुविवाह जैसे मामलों के संवैधानिक पहलुओं को देखने और इन पर दिशानिर्देश जारी करने के लिए पाँच जजों की एक संवैधानिक पीठ गठित की जाएगी.

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या अल्लाह... तुम तो हमें अकेले में चीखने दो और जोर जोर से रोने दो। कहीं एकान्त में हमारा दम ही न निकल जाए। बुरके की घुटन में लोक जीवन की चारदीवारी में हमें इतना जी भर के रो लेने दो कि हमारी आखों में एक भी आंसू बाकी न बचे।

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