top left img

आजादी से पूर्व तक भारतीय उपमहाद्वीप के विजय की चाभी अफगानिस्तान के हेरात व कंधार प्रांत को माना गया, जो खुरासान प्रदेश का दक्षिणी हिस्सा था। यही कारण रहा कि विदेशी आक्रांताओं के लिए खुरासान भारत विजय का मोड्यूल रहा।

Published in आलेख

भारतवासियों ने आतंकी अफज़ल गूरू के समर्थन में नारे लगाने, उसे बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लगाने वालों के “बौद्धिक गिरोह” देखे हैं. इसी प्रकार याकूब को फाँसी से बचाने के लिए यही गिरोह आधी रात को कोर्ट खुलवाने में भी पीछे नहीं रहा है.

Published in आलेख

गत गुरूवार को फ्रांस से पेरिस में करीम चुर्फी नामक एक मुस्लिम ने अचानक अपनी कार से निकलकर एक पुलिस अधिकारी को गोली से उड़ा दिया और दो अन्य पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया.

Published in आलेख

आज चारों ओर “इस्लामिक स्टेट” नामक क्रूर और खूँखार आतंकी संगठन के चर्चे हैं. कुछ वर्ष पहले जब तक ओसामा जीवित था, तब “अल-कायदा” का डंका बजता था... और उससे भी पहले जब अफगानिस्तान में बुद्ध की प्रतिमा को उड़ाया गया था, तब “तालिबान” का नाम चलता था. लेकिन इस्लामिक आतंक के इन विभिन्न नामधारी चेहरों का मूल बीज कहाँ है, इसकी शुरुआत कहाँ से हुई?? अतः इस वैश्विक समस्या को समझने के लिए हमें थोडा और पीछे जाना होगा. पहले हम समस्या के बारे में समझते हैं, फिर इसका निदान क्या हो, इस पर चर्चा होगी...

Published in ब्लॉग
न्यूज़ लैटर के लिए साइन अप करें