अपनी बात शुरू करूं इससे पहले यह स्पष्ट कह देना चाहता हूं कि अपने लिए न तो चेलमेश्वर (Justice Chelmeshwar) समूह कोई भगवान हैं, और न ही दीपक मिश्रा (Justice Deepak Mishra) को ही कोई क्लीन चिट देने का अपना कोई इरादा है. सच कहें तो इस पोस्ट का आशय चार जजों द्वारा उठाये गए मूल प्रकरण पर बात करने से है भी नहीं. अपन तो इस अप्रत्याशित घटना के बाद फेसबुक (Social Media Trial) पर छा गए समर्थन-विरोध और उसके तरीके के प्रति बात करना चाह रहे हैं.

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संवाद एक सिखाई गई चीज़ है. बचपन में हम सब को शब्द और उनसे जुड़े भाव सिखाये गए तो हम बोलने लगे. आगे स्कूल-कॉलेज में लिखना सिखाया गया. समय बदलने के साथ जब सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी संवाद के लिए होने लगा तो इसे भी सिखाया जाना चाहिए था.

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