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गंगा-जमुनी संस्कृति की दुहाई देते देते हुए कुछ लोगों के कंठ अवरुद्ध हो जाते हैं. अवरुद्ध होते कंठों से बहुत मुश्किल से आवाजें निकल पाती हैं. ये आवाजें बहुत ही सिलेक्टिव होती हैं. रोजों के समय न जाने कितने मंदिरों के द्वार नमाज के लिए खोल दिए जाते हैं, और उस समय गंगा जमुनी तहजीब जमकर हिलोरें ले रही होती है.

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बचपन में चिड़िया और बहेलिया की कहानी हम सबने पढ़ी थी, जिसमें चिड़िया जाल में फँस जाती हैं, मगर अपनी एकता के बल पर बहेलिये को हराने में सफल हुई थी। अब समुद्र किनारे अयलान कुर्दी नामक बच्चे की लाश "चारा" है, "दाना" है, "चुग्गा" है.

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