भारतीय समाज में स्त्रियों की प्रमुख प्राकृतिक शारीरिक क्रिया (Menstrual Cycle) अर्थात माहवारी के बारे में बात करना बेहद संवेदनशील, संकोची और पर्दादारी वाला माना जाता है. यहाँ तक कि आज के आधुनिक समय में भी केवल शहरी और महानगरीय क्षेत्रों को छोड़ दें तो कस्बे और गाँवों में यह विषय अभी भी दाएँ-बाँए देखकर फुसफुसाते हुए बात करने वाला विषय माना जाता है. ऐसे समय पर अक्षय कुमार ने Padman (पैड-मैन) फिल्म बनाकर इस धारणा को तोड़ने का सफल प्रयास किया है. पिछले कुछ समय से अक्षय कुमार लीक से हटकर विषयों पर फ़िल्में चुनने लगे हैं, पैडमैन भी इसी श्रृंखला की फिल्म है.

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(यह लेख मूलतः नितिन श्रीधर ने लिखा है, और इसका हिन्दी अनुवाद अवतंस कुमार ने किया है)

इसके पहले वाले लेख में (उस लेख की लिंक यह है)... हमने दुनियाँ भर के विभिन्न मतों और संस्कृतियों में मासिक-धर्म से जुड़ी मान्यताओं और प्रचलनों पर विचार किया था।

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