राम जन्मभूमि का मुद्दा (Ram Mandir Movement) पिछले कई वर्षों से प्रमुख रूप से चर्चा में रहा है, अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) की सुनवाई में अंतिम चरण पर पहुँच चुका है. इस सन्दर्भ में कई-कई पक्ष अपने-अपने दावे कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में मूल सवाल ये है कि राम जन्मभूमि मुद्दे पर हिन्दुओं के अलावा किसी और पक्ष की बात यदि सुननी भी हो, तो वह केवल “सच्चा मुसलमान” की ही हो सकती है, किसी “काफिर” की नहीं. अब सवाल ये उठता है कि सच्चा मुसलमान कौन है? इसके लिए पहले थोड़ी पड़ताल करते हैं. 

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6 दिसंबर 1992 इतिहास में दर्ज ये एक तारीख मात्र नहीं है, ये हो भी नहीं सकती. अपने आप में इतिहास समेटे है ये दिन, 500 वर्षों का इतिहास. अपने रामलला की जन्मभूमि (Ram Mandir Movement) को स्वतंत्र कराने का इतिहास.

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जब एक आधे-अधूरे मंदिर, फटे हुए टेंट में बैठे हुए रामलला, सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की बंदूकों के बावजूद तीन सौ करोड़ रूपए कमा लिए तो जब एक भव्य-विशाल-सुन्दर राम मंदिर बनेगा तो यूपी सरकार के खजाने में कितने हजार करोड़ रूपए प्रतिवर्ष आएँगे??

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