किसी भी सरकार की ठसक केवल कानूनी ही नहीं, सांस्कृतिक-बौद्धिक भी होती है। यह गैर-लोकतांत्रिक तथा लोकतांत्रिक, दोनों सरकारों के लिए सच है।

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सनातन धर्म को लेकर इससे ईर्ष्या-द्वेष करने वाले विधर्मी कई बातों को लेकर सामान्य लोगों में भ्रम और झूठ फैलाने का प्रयास सतत करते रहते हैं. जैसे कि यह झूठ फैलाया जाता है कि प्राचीन वैदिक काल में गौमांस खाया जाता था, अथवा वैदिक काल में सनातन धर्मी ऋषि-मुनियों ने सारा ज्ञान अपने पास छिपाकर रखा, गरीबों-वंचितों को नहीं दिया इत्यादि.

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नवरात्रि आरम्भ हो गयी हैं. विजयदशमी भी आएगी ही. अपने आपको अम्बेडकरवादी, मूलनिवासी, साम्यवादी कहने वाले एक बार फिर से हमेशा की तरह JNU जैसे कुख्यात अड्डे पर विजयदशमी के स्थान पर "महिषासुर शहादत दिवस" मनाने का प्रपंच करेंगे.

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मांसाहार पर बहस जारी है। वैध और अवैध बूचड़खानों पर भी बहस जारी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार के आने के बाद से यह बहस और तेज भले ही हो गई हो, परंतु हमें यह याद रखना चाहिए कि अधिक समय नहीं हुआ है, जब देश में कुछ लोग “गौमांस उत्सव” भी मना रहे थे।

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