भारतीय लोकतंत्र का तथाकथित सेकुलरिज्म अब उस अवस्था को प्राप्त होता जा रहा है, जहाँ कोई भी ऐरा-गैरा-नत्थू-खैरा भारतीय न्याय व्यवस्था और संविधान को लात मारकर अपना सिक्का चलाना चाहता है.

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