पिछले दिनों महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगाँव (Bhima Koregaon) में जो सुनियोजित दंगा और हंगामा हुआ, तथा जिसे जानबूझकर ब्राह्मण विरुद्ध दलित (Anti Brahmin Propaganda) का जामा पहनाया गया, वह वास्तव में नक्सलवादियों-माओवादियों का षड्यंत्र था.

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काफी समय से राष्ट्रीय विमर्श से गायब रहे नक्सली सुकमा में लगातार दो हमलों के बाद फिर से चर्चा के केंद्र में हैं। नक्सलवादियों की यही रणनीति भी है कि बीच बीच में इस तरह की क्रूर हिंसात्मक गतिविधियों द्वारा देश को झकझोरते रहें।

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