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विगत दो दशकों में जब से टीवी जैसे माध्यम ने घरों के ड्राईंग रूमों और बेडरूमों में लगभग कब्ज़ा जमा लिया था, उसी दौर में बहुत से लोगों ने सोचा था कि शायद अब रेडियो के दिन लद गए. लेकिन वे कितने गलत थे, यह बात इसी से सिद्ध होती है, कि रेडियो स्टेशनों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.

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