जब से पिछले कुछ वर्षों में इस्लामिक आतंक की विभीषिका बढ़ी है, तभी से अक्सर यह सवाल कई बौद्धिक क्षेत्रों में उठाया जाता रहा है कि आखिर वह कौन सी शिक्षा है अथवा वह कौन सा ग्रन्थ या किताब है, जिससे प्रभावित होकर अथवा जिसे पढ़कर आतंकी बन रहे हैं.

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