प्रिय रवीश जी, नमस्कार ...

कल आपकी पोस्ट पर मैंने कुछ प्रश्न किये थे. जबाब में आपकी ट्रोल आर्मी अभी तक मैदान में ऊटपटांग बकवास कर रही है. कुछ लोग तो सीधे इनबॉक्स में आ धमके हैं, पूछ रहे हैं मेरी क्वालिफिकेशन क्या है, आप जैसे मठाधीश पर सवाल उठाने की?

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‘सत्ता’ का असली अर्थ मुझे तब समझ में आया जब दिल्ली में मुझे 1994 में “संस्कृति सम्मान” पुरस्कार मिला .वहां स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में मैं दो दिनों तक रुका था.वैसे भी सूचना और संस्कृति मंत्रालयों से मेरा जुडाव तो था ही ,परन्तु इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) वो जगह है जहाँ 'सत्ता' सोने की चमकती थालियों में परोसी जाती है.

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