8 मार्च के दैनिक जागरण में आज बहुत छोटी सी एक कालम की ख़बर है। पाकिस्तानी मूल के लेखक तारिक़ फ़तेह के ख़िलाफ़ मुस्लिम समाज में ज़बरदस्त आक्रोश है। विरोध प्रदर्शनों के बाद उनके ख़िलाफ़ मंगलवार को कोतवाली देवबंद में मुक़दमा दर्ज कराया गया है।

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इंटरनेट के कारण हिंदुस्तान में Cognitive Dissonance का सब से बड़ा मारा कोई है तो युवा मुसलमान है. वह जानता है कि अब सब जानते हैं कि जब उसके पुरखों ने इस्लाम कुबूल किया होगा, वह कोई बहुत गौरवशाली घटना नहीं होगी. वह जिनसे अपना संबंध बता रहा है, उनकी नजर में तो उसकी औकात धूल बराबर भी नहीं है यह भी सब जानते हैं. समाज के तथाकथित रहनुमाओं ने समाज को मजहब के नाम पर पिछड़ा रखा है, यह भी उसे पता है.

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