भारत विश्व का संभवत एक मात्र ऐसा देश होगा जहाँ का इतिहास उस देश के इतिहासकारों ने नहीं अपितु विदेशी इतिहासकारों ने लिखा है। इन पक्षपाती इतिहासकारों ने गौरी , गजनी और अकबर को महान लिखकर भारतीयों को हीन भावना से ग्रस्त करने का प्रयास किया।

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२३-२४ मार्च को अपने आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के तथा इनके कुछ प्रसिद्द छात्रों के ट्विटर अकाउंट बंद हो गए| कुछ लोगों का कहना था कि लेफ्ट विंग के छात्रों ने इन्हें टारगेट करके बहुत बड़ी संख्या में ब्लाक किया, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि ट्विटर इंडिया के कश्मीरी प्रमुख राहील खुर्शीद ने ऐसा किया|

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पिछले १० या १५ सालों से “विकास” नाम का शब्द बार बार सुनने में आता है... हर किसी को विकसित होना है. चाहे लोग हो, समाज हो या देश. यह विकास क्या होता है ? यह कभी पता नहीं चल पाया,

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3600 करोड़ एक मूर्ति के लिए?? 600 मिलियन डॉलर? देश में इतनी भुखमरी है, सड़कें टूटी हुई हैं, कुपोषण है, ठंढ में लोग मर रहे हैं, किसान आत्महत्या करते हैं, ग़रीबी है, बाढ़ है, सूखा है… फिर ये मूर्ति कितनी ज़रूरी है? सरकार की प्राथमिकताएँ, यानि प्रायोरिटीज़, विचित्र हैं।

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