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पुणे के प्रसिद्ध शनिवार पेठ के वीर मारुती चौराहे से शनिवार वाड़े की तरफ जाने वाले एक छोटे से मार्ग का नाम रखा गया है, “केरूनाना छत्रे मार्ग”.

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क्या आपने कभी सुना है कि सरकार ने एक पुस्तक लिखवाने के लिए चालीस लाख रूपए खर्च कर दिए हों? या फिर कभी किसी ऐसे बौद्धिक प्रोजेक्ट(?) के बारे में सुना है जो पिछले 43 वर्ष से चल रहा हो, जिस पर करोड़ों रूपए खर्च हो चुके हों और अभी भी पूरा नहीं हुआ हो? यदि नहीं सुना हो, तो दिल थामकर बैठिये... ICHR जिसे हम “भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद्” के नाम से जानते हैं, वहाँ पर ऐसी कई बौद्धिक लूट हुई हैं.

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