प्रिय गुरमेंहर,

नमस्कार...

पिछले कुछ ही दिनों में तुम्हारी वीडियो पोस्ट और कुछ “मीडिया हाउस”(?) द्वारा तुम्हारा इन्टरव्यू लेने के कारण तुम घर-घर में चर्चा का विषय बन गई हो, मैंने देखा कि तुम “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का झंडा बुलंद कर रही हो और तुमने लिखा है कि तुम्हारे पिता को पाकिस्तान ने नहीं मारा, बल्कि “युद्ध” ने मारा”.

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