जिस प्रकार तुर्की स्थित खलीफाओं के अत्याचारों को नकारने के लिए एक पूरी व्यवस्था को जन्म एवं समर्थन दिया गया, जिसमें गाँधी समर्थित खिलाफत आन्दोलन शामिल है, जबकि यह कोई खिलाफत आन्दोलन (Khilafat Movement) नहीं था, यह तुर्की के इस्लामी खलीफा को बचाने वहां लोकतंत्र की स्थापना के खिलाफ आन्दोलन था.

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भारत के फर्जी इतिहासकारों ने अभी तक आपको हमेशा मुगलों (यानी बाहरी आक्रान्ताओं) के तमाम रोमांटिक किस्से ही सुनाए हैं. मुग़ल शासकों के अत्याचारों, हत्याकांडों और बलात्कारों को तो इन कथित इतिहासकारों ने छिपाया ही...

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२३-२४ मार्च को अपने आप अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के तथा इनके कुछ प्रसिद्द छात्रों के ट्विटर अकाउंट बंद हो गए| कुछ लोगों का कहना था कि लेफ्ट विंग के छात्रों ने इन्हें टारगेट करके बहुत बड़ी संख्या में ब्लाक किया, जबकि कुछ लोगों का कहना था कि ट्विटर इंडिया के कश्मीरी प्रमुख राहील खुर्शीद ने ऐसा किया|

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