हाल ही में राजकोट गुजरात से आए हुए एक वीडियो ने पारिवारिक मूल्यों पर सबसे बड़ा आघात किया है. लोगों के दिलोदिमाग को हिलाकर रख दिया है. एक मानसिक रूप से अपंग माँ को उसका अपना ही बेटा छत से धकेल रहा है.

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“बाराहा” के वासु, “अक्षरमाला” के श्रीनिवास अन्नम, “कैफ़े-हिन्दी” के मैथिली गुप्त, लिनक्स हिन्दीकरण के महारथी रवि रतलामी, “गमभन” के ओंकार जोशी, प्रभासाक्षी के बालेन्दु शुक्ल, “वेबदुनिया” के विनय छजलानी, हिन्दी ब्लॉगिंग और हिन्दी कम्प्यूटिंग को आसान बनाने वाली हस्तियाँ अविनाश चोपड़े, रमण कौल, आलोक कुमार, हरिराम जी, देबाशीष, ई-स्वामी, हिमांशु सिंह, श्रीश शर्मा....और इन जैसे कई लोग हैं... ये लोग कौन हैं? क्या करते हैं? कितने लोगों ने इनका नाम सुना है?....मैं कहता हूँ, ये लोग “हिन्दी” भाषा को कम्प्यूटर पर स्थापित करने के महायज्ञ में दिन-रात प्राणपण से आहुति देने में जुटे हुए “साधक” हैं, मौन साधक।

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